केंद्र सरकार ने तीन मूर्ति स्टेट को सभी प्रधानमंत्रियों का म्यूजियम बनाने के फैसले का विरोध करने वाले नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसायटी (एनएमएमएल) के तीन सदस्यों को हटा दिया है। उनकी जगह पत्रकार अर्नब गोस्वामी, भाजपा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर और आईजीएनसीए के चेयरमैन राम बहादुर राय को सदस्य नियुक्त किया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर एनएमएमएल की एग्जिक्यूटिव काउंसिल के वाइस चेयरमैन बने रहेंगे। 29 अक्तूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, संस्कृति मंत्रालय ने अर्थशास्त्री नितिन देसाई, प्रोफेसर उदयन मिश्रा और पूर्व नौकरशाह बीपी सिंह को हटाया है। अन्य सदस्य प्रताप भानु मेहता ने 2016 में शक्ति सिन्हा को एनएमएमएल का निदेशक बनाए जाने पर इस्तीफा दे दिया था। नए सदस्यों का कार्यकाल 25 अप्रैल 2020 तक होगा।
इस बारे में एनएमएमएल के निदेशक सिन्हा ने बताया कि तीनों सदस्यों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था, उन्हें बदला गया है। हालांकि माना जा रहा है कि केंद्र सरकार के म्यूजियम बनाने के प्रस्ताव का विरोध करने के कारण ही तीनों की छुट्टी की गई है। इस घटनाक्रम पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि जिन लोगों के हटाया गया है, वे मजबूत इच्छाशक्ति वाले लोग हैं।
इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पत्र लिखकर तीन मूर्ति स्टेट को म्यूजियम बनाने का विरोध किया था। तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की रिहायश थी। उन्हीं की याद में 1 अप्रैल 1966 को उसी संपति पर नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी की स्थापना हुई थी।