राष्ट्रपति के संसद के संयुक्त सत्र में सुशासन लाने और जनहित में काम का दावा करने के ठीक एक दिन बाद शुक्रवार को सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े प्रहार की शुरुआत कर दी है। केंद्र सरकार ने देश के सभी बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य विभागों से भ्रष्ट और नकारा कर्मचारियों की सूची मांगी है।
सभी सरकारी संस्थाओं को उनके यहां काम करने वाले कर्मी, भ्रष्टाचार में लिप्त, नकारा और उम्मीद के अनुकूल काम नहीं कर पा रहे कर्मचारियों का ब्योरा हर माह के पहले 15 दिनों के भीतर एक निर्धारित प्रारूप में उनके संबंधित मंत्रालयों के पास भेजना होगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत 15 जुलाई से होगी।
सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त, नकारा और उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने वाले कर्मचारियों को हटाने के लिए संविधान का सहारा लेगी। संविधान के मौलिक नियम 56 (जे), (आई) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के तहत ऐसी व्यवस्था है कि सरकार जनहित में ऐसे कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर सकती है जिनकी सत्यनिष्ठा पर संदेह हो और जिनका काम जनहित में प्रभावी नहीं है।
केंद्र सरकार ने इस कानून का सहारा लेते हुए हाल ही में 15 आईआरएस के पर जनहित में गाज गिराई थी। इसी महीने की शुरुआत में आयकर विभाग के 12 आईआरएस अफसरों को भी इसी नियम के तहत हटाया गया था।