केंद्र सरकार ने वायनाड भूस्खलन को गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित किया है। केंद्र का यह फैसला भूस्खलन के पांच महीने बाद आया है। केंद्र ने केरल सरकार को पत्र लिख बताया है कि इस तरह की गंभीर आपदाओं में पहले राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाती है।
वायनाड में हुए विनाशकारी भूस्खलन से तीन गांव नष्ट होने के पांच महीने बाद, केंद्र सरकार ने इसे 'गंभीर प्राकृतिक' आपदा घोषित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल सरकार को एक पत्र में बताया है कि इस तरह की गंभीर आपदाओं के लिए प्रारंभिक वित्तीय सहायता राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) द्वारा दी जाती है, जिसे बाद में आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) द्वारा बढ़ाया जाता है। यह काम अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) द्वारा किया जाता है।
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पत्र में कहा गया है, 'हालांकि, वायनाड जिले में मेप्पडी भूस्खलन आपदा की तीव्रता और परिमाण को ध्यान में रखते हुए, इसे सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए गंभीर प्रकृति की आपदा माना गया है।'
संसद में विरोध के बाद केंद्र ने लिया निर्णय
केंद्र का यह निर्णय राज्य सरकार की आलोचना और संसद में सांसदों द्वारा वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता नहीं देने के विरोध के बीच आया।
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भूस्खलन से हुई थीं 200 से अधिक मौतें
30 जुलाई को, मूसलाधार बारिश के कारण वायनाड के चूरलमाला और मुंडक्कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 200 से अधिक मौतें हुईं, कई घायल हुए और हजारों लोग बेघर हो गए। इसे केरल के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है।