पत्र में रवि ने उल्लेख किया था कि कैसे सशस्त्र गिरोह जबरन वसूली रैकेट चला रहे हैं और लोगों की बीच डर फैला रहे हैं। जबकि राज्य प्रशासन उन पर लगाम लगाने में विफल रहा है।
पत्र में उन्होंने लिखा कि ‘आधा दर्जन से अधिक संगठित गिरोह दिन-ब-दिन अनर्गल उपद्रव कर रहे हैं और अपनी तथाकथित सरकार चला रहे हैं। राज्य कानून और व्यवस्था से किसी भी प्रतिरोध के बिना वे सरकार की वैधता को चुनौती दे रहे हैं जिससे विश्वास का संकट पैदा हो गया है।’
आरएन रवि को अगस्त 2019 में नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। वे नागा शांति वार्ता के लिए केंद्र के वार्ताकार भी हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने नागा विद्रोही समूहों के बारे में उल्लेख किया है, जिनमें से अधिकांश केंद्र के साथ शांति वार्ता में लगे हुए हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा, ‘सशस्त्र समूहों द्वारा उग्र रूप से हिंसा के जरिए कानून का पालन करने वाले नागरिकों को परेशान किया जाता है। राज्य सरकार के विकास विभाग सशस्त्र गिरोहों को नियमित रूप से फिरौती देने के लिए दबाव में हैं। वहीं समूहों द्वारा हथियारों का प्रदर्शन करने से लोगों में दहशत फैल गई है।’
राज्यपाल ने पत्र उल्लेख किया था कि कैसे गिरोह राज्य के प्रवेश बिंदुओं पर चेक गेट संचालित करते हैं और नागालैंड में प्रवेश करने वाले सभी सामानों पर अवैध कर लगाते हैं। वहीं राज्य की कानून और व्यवस्था को इसकी पूरी जानकारी है।
नागालैंड में आने वाला माल सशस्त्र बदमाशों द्वारा बंदूक की नोंक पर उगाही करने से अत्यधिक महंगा हो जाता है। उन्होंने सीएजी की 2018 की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें बताया गया था कि कैसे सरकारी विभाग से सशस्त्र समूहों को फंड दिया जाता है।