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Organ Donation: 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग भी कर सकेंगे पंजीकरण, अब निवास प्रमाण-पत्र भी जरूरी नहीं

Thu, 16 Feb 2023 09:59 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए भारत सरकार ने निवास प्रमाण पत्र की जरूरत को भी हटा दिया है। इस बाबत सभी राज्यों को जानकारी दे दी गई है।  
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अंग प्रत्यारोपण के बदले नियम - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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देश में अंग प्रत्यारोपण के प्रति लोगों को जागरुक करने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। अब सरकार ने अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। भारत सरकार इसके लिए भी 'वन नेशन, वन पॉलिसी'  लागू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने इसके बारे में जानकारी दी। उनका कहना है कि ''वन नेशन, वन पालिसी फॉर आर्गेन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांट' देश के किसी भी अस्पताल में मृतक दाताओं से प्रत्यारोपण की मांग करने में मरीजों की मदद करेगी। 

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सरकार ने किया नियमों में बदलाव
अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए भारत सरकार ने निवास प्रमाण पत्र की जरूरत को भी हटा दिया है। इस बाबत सभी राज्यों को जानकारी दे दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से भी मूल-निवास मानदंड को हटाने की सिफारिश की है ताकि जरूरतमंद मरीज अंग प्राप्त करने के लिए किसी भी राज्य में अपना पंजीकरण करा सकें। इसके अलावा मंत्रालय ने राज्यों से पंजीकरण के लिए मरीजों से कोई शुल्क नहीं लेने को भी कहा है। सरकार ने कहा है कि यह मानव अंगों और ऊतकों के प्रतिरोपण नियम, 2014 के प्रावधानों के खिलाफ है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात और केरल जैसे राज्य अंगदान के रजिस्ट्रेशन के नाम पर  5,000 से 10,000 रुपये के बीच शुल्क वसूल करते रहे हैं।

65 साल से ऊपर के मरीज भी करा सकेंगे आवेदन
केंद्र द्वारा नियमों में बदलाव के बाद अब 65 साल और उससे अधिक उम्र के मरीज भी मृतक दाता से अंग प्राप्त करने के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि अभी तक मृत दाताओं के अंगों की आवश्यकता वाले रोगियों के पंजीकरण के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 साल थी। इस प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद अब सभी आयु वर्ग के रोगी मृत दाताओं के अंगों के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की वेबसाइट पर सभी दिशानिर्देश बताए गए हैं।  
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10 सालों में अंग प्रत्यारोपण की बढ़ी संख्या
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अंग प्रत्यारोपण के मामलों की संख्या 2013 में 4,990 से बढ़कर 2022 में 15,561 हो गई है। साथ ही जीवित दाताओं से किडनी प्रत्यारोपण के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। किडनी प्रत्यारोपण की कुल संख्या 2013 में 3,495 से बढ़कर 2022 में 9,834 हो गई है वहीं मृतक दाताओं से यह संख्या 542 से बढ़कर 2022 में 1,589 तक पहुंच गई है। इसी तरह हृदय प्रत्यारोपण की कुल संख्या 2013 में 30 से बढ़कर 2022 में 250 हो गई है वहीं फेफड़े के प्रत्यारोपण की संख्या 23 से बढ़कर 138 हो गई है।

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