पटेल का इस्तीफा 14 दिसंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की बैठक से पहले आया है। ऐसा माना जा रहा है कि बैठक में सरकार के प्रतिनिधि केंद्रीय बैंक पर कुछ क्षेत्रों को कर्ज देने की शर्तों को आसान बनाने पर जोर देंगे ताकि नकदी संकट को कम कर 2019 आम चुनावों से पहले विकास को रफ्तार बढ़ाई जा सके और नई नौकरियों का सृजन किया जा सके। साथ ही सरकार आरबीआई पर अतिरिक्त पूंजी को सरकार को देने का दबाव बना सकते हैं।
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी तरफ से लिखे गए एक पत्र के मुताबिक उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है। उन्हें वर्ष 2016 में तीन साल के लिए रिजर्व बैंक का गवर्नर नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल अगले साल सितंबर में समाप्त हो रहा है।
पटेल ने अपने पत्र में कहा है--व्यक्तिगत कारणों से, मैंने तत्काल प्रभाव से अपना पद छोड़ने का फैसला किया है। पिछले कुछ वर्षों से रिजर्व बैंक में विभिन्न पदों पर काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने रिजर्व बैंक के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का धन्यवाद भी किया है। उन्होंने लिखा है कि हाल के वर्षों के दौरान कमचारियों, अधिकारियों और प्रबंधन की कड़ी मेहनत ही बैंक की उपलब्धि का कारक रहा है। वह अपने सहयोगियों एवं केंद्रीय बोर्ड के निदेशकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उन्हें आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
इसके कुछ ही देर के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दे दी। जेटली ने दो ट्वीट में लिखा --सरकार रिजर्व बैंक के गवर्नर और उप राज्यपाल के रूप में डा. उर्जित पटेल की सेवा की सराहना करती है। उन्होंने बैंक के डिप्टी गवर्नर और गवर्नर के रूप में जो सेवा दी उसे स्वीकार करता हूं। यह मेरे लिए खुशी की बात है कि मैंने उनके साथ काम किया और उनकी विद्वता से लाभान्वित हुआ।-- उन्होंने पटेल के भावी जीवन की बेहतरी की कामना की है।