सुप्रीम कोर्ट ने छह अप्रैल को दिए अपने आदेश में बदलाव करते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार को दिल्ली के मास्टर प्लान-2021 में संशोधन की इजाजत दे दी है। लेकिन इस संशोधन की कमान का एक सिरा आम जनता के हाथ में भी दे दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले 15 दिन में दिल्ली की जनता से आपत्तियां मांगी जाएं। कोर्ट ने ये भी कहा कि मास्टर प्लान में संशोधन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले जनता की आपत्तियों का निराकरण किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने सरकार को दस दिनों के भीतर तीन दिनों तक लगातार हिन्दी और अंग्रेजी अखबारों में प्रस्तावित संशोधन प्रकाशित कर जनता से आपत्तियां मांगने के लिए कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण(डीडीए) को एक मोबाइल एप शुरू करने के लिए भी कहा है, जिसके द्वारा लोग अवैध निर्माण की शिकायत दर्ज करा सके।
डीडीए अधिकारियों को निलंबित करने के भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा है कि जिन इलाकों में अवैध निर्माण हुआ है, वहां के डीडीए अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सरकार को 17 मई को अगली सुनवाई पर इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
हालांकि मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और डीडीए की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन पर फैसला कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं
अटॉर्नी जनरल ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन पर रोक लगाने का फैसला सही नहीं है। यह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में है कि वह जनहित को देखते हुए कानून लेकर आए। उन्होंने कहा कि अदालत संशोधन आने से पहले रोक नहीं लगा सकती। संशोधन आने के बाद अदालत इस पर विचार कर सकती है।
क्या है मास्टर प्लान-2021
मास्टर प्लान-2021 शहरी विकास योजना और राजधानी के विस्तार का ब्लूप्रिंट है, जो सभी जगह के समान विकास के लिए बनाया गया है। इसमें प्रस्तावित संशोधन में आवासीय भूखंडों की तरह मकान में दुकान या पूरी तरह कामर्शियल कॉम्पलेक्स बना लेने वालों के लिए सब जगह एकसमान फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को लागू करना है।