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Electoral Bonds: राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने की सरकार की कोशिश, चुनावी बांड की 22वीं किश्त को मंजूरी

Thu, 29 Sep 2022 05:13 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी करके इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि चुनावी बांड की बिक्री के लिए भारतीय स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को अधिकृत किया गया है। इन शाखाओं पर चुनावी बांड की बिक्री के 22वें चरण में 1 से 10 अक्टूबर के बीच चुनावी बांड जारी और भुनाए जा सकेंगे।
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वित्त मंत्रालय की आईएमआर रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चुनावी बांड की 22वीं किश्त को जारी करने के लिए अपनी मंजूरी दी है। सरकार के निर्देशानुसार, ये चुनावी बांड एक अक्टूबर से बिक्री किए जांएगे। केंद्र सरकार ने राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत गुरुवार को राजनीतिक दलों को दिए गए नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बांड पेश किया है। 

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केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी करके इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि चुनावी बांड की बिक्री के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की 29 शाखाओं को अधिकृत किया गया है। इन शाखाओं पर चुनावी बांड की बिक्री के 22वें चरण में 1 से 10 अक्टूबर के बीच चुनावी बांड जारी और भुनाए जा सकेंगे। अधिकृत एसबीआई शाखाओं में लखनऊ, शिमला, देहरादून, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई, पटना, नई दिल्ली, चंडीगढ़, श्रीनगर, गांधीनगर, भोपाल, रायपुर और मुंबई में शाखाएं शामिल हैं।

बता दें कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों की तारीखों की घोषणा आने वाले कुछ हफ्तों में की जा सकती है।

गौरतलब है कि चुनावी बांड की बिक्री की 21वीं किश्त 1-10 जुलाई 2022 तक हुई थी। वहीं, चुनावी बांड के पहले बैच की बिक्री 1-10 मार्च 2018 तक हुई थी। एसबीआई इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने वाला एकमात्र अधिकृत बैंक है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि ये चुनावी बांड जारी होने की तारीख से 15 दिनों के लिए वैध होगा। साथ ही अगर बांड की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद बांड जमा किया जाएगा तो किसी भी राजनीतिक दल को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। ये चुनावी बांड भारतीय नागरिकों या देश में निगमित या स्थापित संस्थाओं द्वारा खरीदे जा सकते हैं। पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम 1 प्रतिशत वोट हासिल करने वाले पंजीकृत राजनीतिक दल चुनावी बांड के माध्यम से धन ले सकते हैं। 

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