मतों की बूथवार गिनती की वर्तमान प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतभेद की स्थिति है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक चुनाव आयोग इस व्यवस्था को वोटों की गिनती समूह में करने के नियम से बदलना चाहता है जिससे वोटरों की गोपनीयता बरकरार रखी जा सके, जिससे चुनाव के बाद राजनीतिक दल वोटरों को परेशान न कर सकें।
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो मतगणना में बूथवार मतगणना के खिलाफ था और इस मामले में संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार से कहा था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को ये कहकर अस्वीकार कर दिया कि वोटों की गिनती की वर्तमान व्यवस्था ज्यादा फायदेमंद है।
जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम खानविलकर और जस्टिस शांतनगौधर की पीठ के सामने चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट अशोक देसाई ने बात रखी। उन्होंने कहा कि मतगणना की वर्तमान प्रणाली से राजनीतिक पार्टियों को ये पता चल जाता है कि किस इलाके के वोटरों ने उन्हें वोट दिए हैं और किस इलाकों के नहीं। इससे वोटरों पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा निशाना बनाए जाने का डर बना रहता है।