केंद्र सरकार अब हिंसक विरोध से बाज नहीं आ रहे कश्मीर के उपद्रवकारियों से सख्ती से निबट कर हालात सामान्य करने के पक्ष में है। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की दो दिन की यात्रा से लौटने के बाद अलवाववादी हुर्रियत नेताओं को केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले विदेश यात्रा, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और धन जैसी सुविधाओं और प्रशासनिक सहूलियतों को समाप्त करने पर गंभीर विचार किया जा रहा है। इधर पंचायती राज जैसी संस्थाओं को मजबूत कर सुशासन कायम करने और युवाओं को मुख्य पक्षकार (स्टेक होल्डर) की भूमिका में सामने लाने के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी केसाथ कश्मीर मसले पर एक घंटे बातचीत की। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केसाथ दो दिन की कश्मीर यात्रा से लौटने के बाद गृहमंत्री ने घाटी के हालात की जटिलताएं और आगे की रणनीति पर चर्चा की। सरकार ने संकेत दिया है कि वहां के हालात को जल्द से जल्द काबू में लाने के लिए कई स्तर पर एक साथ कदम उठाए जाएंगे।
इनमें राजनीतिक और प्रशासनिक पहल भी शामिल है। इस सिलिसिले में शाम को राजनाथ सिंह केनिवास पर वित्त मंत्री अरुण जेटली, पीएमओ में राज्य मंत्री और इस प्रक्रिया के मुख्य स्तंभ जितेन्द्र सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव व पार्टी में कश्मीर के इंचार्ज राम माधव की अहम बैठक हुई।