गौड़ा ने कहा, 'यूरिया आपूर्ति की स्थिति पूरे देश में आरामदायक है। यहां तक कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी, हमने आवश्यकता से अधिक आपूर्ति की है। संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव पूरी तरह से संतुष्ट हैं।' उन्होंने कहा कि केंद्र की जिम्मेदारी राज्यों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति करना है, लेकिन समय पर किसानों को उचित वितरण सुनिश्चित करने का काम राज्यों का है।
यूरिया की किसी भी प्रकार की कमी की संभावना को नकारते हुए गौड़ा ने कहा, 'कुछ राज्य इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं और वे केंद्र को दोष देना चाहते हैं क्योंकि उनकी (राज्यों) वितरण व्यवस्था किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।' उन्होंने कहा कि स्वदेशी यूरिया के अलावा, विभिन्न बंदरगाहों पर लगभग दस लाख टन आयातित यूरिया है। इसके अलावा, चालू महीने और जनवरी में 10 लाख टन से अधिक आयातित यूरिया आने की उम्मीद है।
राज्यों में यूरिया खपत के शीर्ष दौर को ध्यान में रखते हुए, रेल मंत्रालय के साथ तालमेल में उर्वरक मंत्रालय ने पहले ही देश के पश्चिमी तट और पूर्वी तट के दोनों बंदरगाहों से यूरिया की आवाजाही को प्राथमिकता दी है। गौड़ा ने यह भी कहा कि केंद्र सभी राज्यों और किसी भी प्रकार के उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
यूरिया की अधिकतम खुदरा कीमत 5,360 रुपये प्रति टन तय की गई है। यह सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला उर्वरक है क्योंकि इस पर काफी सब्सिडी दी जाती है। भारत सालाना 2.4 करोड़ टन यूरिया का उत्पादन करता है और इसकी कमी को पूरा करने के लिए लगभग 50 - 60 लाख टन यूरिया का आयात करता है।