कोरोना संक्रमण की वजह से केंद्रीय सुरक्षा बलों के सामान्य तबादलों को लेकर पेच फंस गया है। लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि फिलहाल सभी तबादले रोक दिए जाएं। यदि किसी कर्मी का तबादला या प्रमोशन आदेश पहले जारी हो चुका है तो भी उन्हें नई पोस्टिंग न दी जाए।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के सूत्रों के अनुसार, अभी तबादलों को लेकर कोई नीति स्पष्ट नहीं है। लॉकडाउन 4.0 के खत्म होने के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। केंद्र सरकार क्या नीति बनाती है, कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की क्या गाइडलाइन रहेंगी, ये सब बातें ध्यान में रखकर ही अगला कदम उठाया जाएगा। अभी तो वे जवान और अधिकारी भी वापस नहीं आ सके हैं जो लॉकडाउन से पहले छुट्टी गए थे और वहीं फंस गए।
बीएसएफ में अभी तबादले नहीं हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बाबत अभी पॉलिसी बनाई जा रही है। चूंकि अभी तक बीएसएफ को अपना डीजी भी नहीं मिला है। ढाई माह से डीजी का पद खाली पड़ा है। आईटीबीपी के डीजी को बीएसएफ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
लॉकडाउन खत्म होने के बाद यहां पर तबादले शुरू होंगे। इसी तरह एसएसबी में भी मार्च के दौरान तबादले हो चुके हैं, लेकिन किसी को रिलीव नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि अगले महीने में उन्हें नई पोस्टिंग के लिए रवाना किया जा सकता है।
बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल में जवानों को अब यह चिंता सता रही है कि उनकी लॉकडाउन में खत्म हुई छुट्टियां कैसे एडजस्ट होंगी। क्या उन्हें कैजुअल लीव में जोड़ा जाएगा या कोई अन्य विशेष प्रावधान होगा। अगर कैजुअल लीव में जुड़ती हैं तो अधिकांश छुट्टियों का खत्म होना तय है।
लॉकडाउन के दौरान सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों में उनकी कुल संख्या का करीब 20 फीसदी स्टाफ छुट्टी पर रहा है। सीआरपीएफ में 53 हजार, बीएसएफ में करीब 47 हजार, एसएसबी में 15 हजार, आईटीबीपी में भी 15 हजार से अधिक, सीआईएसएफ में 30 हजार और असम राइफल में लगभग 13 हजार जवान छुट्टी पर बताए गए हैं। एनएसजी में भी करीब 14 सौ जवान छुट्टी पर गए थे।