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नमामि गंगे अभियान को लेकर मोदी-रावत सरकार में खींचतान शुरू

Fri, 02 Sep 2016 02:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
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नमामि गंगे अभियान को लेकर केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार के बीच खींचतान दिखने लगी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। सीएम ने राज्य के अधिकारों में हस्तक्षेप और अभियान से जुड़े मामलों में उपेक्षा की जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी।
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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि एनजीटी ने राज्य में एसटीपी निर्माण का काम छह महीने के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए थे। जबकि डब्ल्यूएपीसीओएस का आकलन , फिजीबिलिटी स्टडीज और आरंभिक गतिविधियों के लिए बिना राज्य सरकार की सहमति के कार्यदायी संस्था और पीएमसी नियुक्त कर दिया गया है।

जिससे डब्ल्यूएपीसीओएस का पीएमसी एवं क्रियान्वयन संस्था नियुक्त करना हितों में टकराव का कारण बन गया है। सीएम ने बताया कि राज्य कार्यदायी एजेंसी की ओर से जमा की गई डीपीआर का कोई संज्ञान भी नहीं लिया गया है। जबकि डब्ल्यूएपीसीओएस की ओर जमा किए गए प्रोजेक्ट को एनएमसीजी ने बहुत कम समय में ही अनुमोदित कर दिया।
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नदी संरक्षण राज्य का विषय है

फाइल फोटो - फोटो : AmarUjala
उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएपीसीओएस ने 13 शहरों की आकलन रिपोर्ट उत्तराखंड जल संस्थान से बनवाई और डीपीआर के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। जबकि इसे अपनी रिपोर्ट व्यापक सर्वेक्षण तथा आकलन के आधार पर तैयार करनी थी।

डब्ल्यूएपीसीओएस को नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा बेसिन में आरंभिक स्तर की गतिविधियों का उत्तरदायित्व दिया गया है। जबकि उचित होगा 132 ग्राम पंचायतों में आरंभिक स्तर की गतिविधियों को पूरा किया जाए तथा बायो डाइजेस्टर लगाने  के लिए डीपीआर शीघ्र जमा की जाए। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण राज्य का विषय है।
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बिना स्थानीय लोगों और संस्थाओं के प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता है- रावत

फाइल फोटो - फोटो : file photo
अत: केंद्र तथा राज्य को यह उत्तरदायित्व उचित रूप से उठाना चाहिए। सीएम ने कहा कि बिना स्थानीय लोगों और संस्थाओं के यह प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता है। सीएम ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ओ एंड एम राज्य की ओर से निर्धारित एजेंसी जैसे जल संस्थान से कराने चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य में खुले में शौच से मुक्ति के लिए कार्य प्रगति पर है।

40 ग्राम पंचायतों में यह कार्य पूरा हो चुका है। रामनगर, सितारगंज, तथा काशीपुर में औद्योगिक व सीवेज प्रदूषण  से संबंधित कार्य में नमामि गंगे के तहत वित्तीय सहायता दिए जाने की आवश्यकता है। राज्य 951.98 करोड़ की 25 डीपीआर जमा कर चुका है लेकिन इसका अनुमोदन प्राप्त नहीं हुआ है। सीएम ने विभिन्न मांगों से संबंधित एक पत्र भी केंद्रीय मंत्री को सौंपा। 
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