केंद्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से अपने पति और नाबालिग पुत्री के साथ अमेरिका में फंसी गर्भवती महिला की भरसक मदद के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। वह कल रवाना होने वाली सैन फ्रांसिस्को-बेंगलुरू की उड़ान पकड़ सके इसके लिए कोशिश जारी है। यह महिला गर्भावस्था के अग्रिम चरण में है।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस दंपती की याचिका पर सुनवाई के दौरान सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी। इस दंपती ने सैन फ्रांसिस्को से 13 मई को उड़ान भरने वाले विमान में यथासंभव उन्हें स्थान उपलब्ध कराने और भारत लाने का निर्देश देने का न्यायालय से अनुरोध किया है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सालिसीटर जनरल ने कहा है कि याचिकाकर्ता (महिला) की सेहत का संज्ञान लेते हुए कल सैन फ्रांसिस्को से बंगलुरू के लिए उड़ान भरने वाले विमान से या फिर इसके बाद यथाशीघ्र आने वाली उड़ान से याचिकाकर्ताओं को भारत लाने के गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में अब किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है। पीठ ने इसके साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया। अधिवक्ता आनंद संजय नूली ने याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका पर बहस की। याचिका में अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था कि इस गर्भवती महिला के भारत लौटने तक उसके लिए उचित चिकित्सा सुविधा का भी बंदोबस्त किया जाए। याचिका में कहा गया था कि समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलना महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
यह दंपती कारोबार के साथ ही छुट्टियां मनाने के लिए 27 फरवरी को अमेरिका गया था। इस दंपतीका छह अप्रैल का वापसी का टिकट था। परंतु कोविड-19 महामारी के मद्देनजर मार्च महीने में लागू लॉकडाउन की वजह से याचिकाकर्ता नेवादा के डेटन मे फंस गए हैं।