केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने संसदीय समिति से कहा है कि राज्य सरकारें ओवरटाइम का भुगतान किए बिना कर्मचारियों से एक दिन में आठ घंटे से अधिक काम नहीं करा सकती हैं। सरकार की ओर से यह स्पष्टीकरण उन खबरों को लेकर आया है जिसमें कहा गया है कि कुछ राज्य सरकारों ने श्रम कानूनों कमजोर करने की कोशिश की है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को श्रम मामलों पर संसद की स्थायी समिति को कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के मुद्दे का सामने के चलते राज्य सरकारों ने श्रम कानूनों में बदलाव की कोशिश की। बैठक की अध्यक्षता बीजद सांसद भर्तृहरि महताब ने की।
नौ राज्यों ने श्रम कानून को कमजोर करते हुए काम करने की अवधि आठ घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने का प्रस्ताव किया था लेकिन ट्रेड यूनियनों समेत विभिन्न स्टेकहोल्डरों के विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया। समिति ने इस मुद्दे पर केंद्र से जवाब तलब किया था।