ब्लू व्हेल गेम के आतंक पर रोक लगाने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। केंद्र की ओर से कहा गया है कि गेम पर तकनीकी बैन लगाना संभव नहीं है, इसलिए पेरेंट्स को हिदायत दी जाती है कि वे अपने बच्चों पर नजर बनाए रखे।
केंद्र सरकार ने कहा कि पेरेंट्स अपने बच्चे के डिप्रेशन में जाने से बचाए या फिर उन्हें ऐसा लगता है कि वे डिप्रेशन में हैं तो उन्हें इन गेम्स का शिकार होने से बचाने की पूरी कोशिश करे। दरअसल, गेम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि वे इसे रोकने के सुझाव उनके सामने पेश करे।
अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट के नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि बच्चों पर नजर रखने के लिए शिक्षा संस्थानों को गाइडलाइंस भेजी गई थी। गाइडलाइंस में बताया गया कि माता-पिता ये देखे कि उनके बच्चे अगर नेट यूज कर रहे हैं तो वे क्या कर रहे हैं? साथ उन्होंने गुजारिश करते हुए कहा कि हर डिप्रेशन से जुड़ी मौत को ब्लू व्हेल गेम से न जोड़ें। साथ ही मामला ज्यादा बढ़ जाने पर अधिक मौतें हो सकती हैं और गेम को खेलने की उत्सुकता भी इसका कारण है।
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बता दें कि ब्लू व्हेल ऐसी गेम है जिसमें करीब 50 टास्क है और हर टास्क पर खेलने वाले को खुद को नुकसान पहुंचाने का टारगेट दिया जाता है। गेम को खेलने वाले अपना दोस्त मानने लगते हैं और वे हर स्टेज को पार करने की कोशिश में जुट जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामले सामने आए थे, जहां लोगों ने अपनी जिंदगी को खत्म कर दिया था।