केंद्र सरकार ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए और छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ मॉड्यूलर अस्पताल बनाने का निर्णय लिया है। सरकार इसके लिए राज्यों से बात कर रही है जहां ऐसे अस्पतालों की आवश्यकता है।
कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहे भारत ने संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने इसके लिए अगले तीन महीनों में देशभर में 50 मॉड्यूलर अस्पताल बनाने की योजना बनाई है। इन अस्पतालों में आईसीयू बेड के साथ ऑक्सीजन की व्यवस्था भी की जाएगी।
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मॉड्यूलर अस्पतालों की खास बात यह होगी कि इन्हें महत तीन सप्ताह में तैयार किया जा सकेगा। एक अस्पताल के निर्माण में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत आएगी। आपदा के समय में इन अस्पतालों के एक सप्ताह के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जा सकेगा। इनकी आयु कम से कम 25 साल होती है।
एक मॉड्यूलर अस्पताल में 100 बेड होंगे। इसके अलावा आईसीयू के लिए अलग क्षेत्र होगा। ये अस्पताल ऐसे अस्पतालों के पास बनाए जाएंगे जहां बिजली, पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था होगी। सरकार का कहना है कि ये अस्पताल छोटे शहरों में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर (स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की) की कमी पूरी करेंगे।