राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) दिशाहीन नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके मुखिया हैं। यह जवाब गृह मंत्रालय ने हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष कहा गया है कि एनडीएमए और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) में दो साल से पद खाली पड़े हैं।
प्राधिकरण के सदस्य मन मुताबिक काम कर रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा कि एनडीएमए में चार सदस्य हैं। यहां साप्ताहिक बैठक होती है। बैठक में आपदा प्रबंधन की योजनाओं व कार्यक्रमों को लागू करने पर चर्चा होती है। इसके अलावा जब भी जरूरत होती है तो पीएमओ व गृह मंत्रालय से मार्ग दर्शन मिलता है।
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हलफनामे में कहा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत दी गई जिम्मेदारियों का निर्वाह एनडीएमए व एनआईडीएम कर रहे हैं। यह कहना गलत है यह दोनों संगठन मृत हो चुके हैं। केंद्र सरकार की ओर से यह जवाब अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की जनहित याचिका पर दिया गया है।