देश में पर्यावरण प्रदूषण और पेट्रोलियम ईंधन की चुनौतियों से निपटने के प्रयासों के तहत केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और चंडीगढ़ के लिए 670 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी दी है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और पोर्ट ब्लेयर के लिए 241 चार्जिंग स्टेशनों की स्वीकृति दी गई। यह सौगात फेम इंडिया योजना के चरण दो के तहत दी गई।
फेम इंडिया योजना के चरण-दो तहत दी गई स्वीकृति
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को कहा कि यह निर्णय सरकार की पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता को कम करने और वाहन से उत्सर्जन के मुद्दे को हल करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन के भी अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी शुरुआत है। शहरों में ई-बसों, ई-रिक्शा, ई-स्कूटी तथा ई-कारों से पर्यावरण अनुकूल परिवहन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कई ट्वीट कर उन्होंने बताया कि कोल्लम के लिए 25, तिरुवनंतपुरम के लिए 27, मलप्पुरम (सभी केरल) के लिए 28 चार्जिंग स्टेशनों की मंजूरी दी गई है। पोर्ट ब्लेयर के लिए 10 और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के लिए 25 चार्जिंग स्टेशनों को स्वीकृति दी गई है। जावड़ेकर ने कहा कि बिजली चालित वाहनों को प्रोत्साहन के लिए चार्जिंग स्टेशन सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा है। उन्होंने कहा कि पहले ही विभिन्न शहरों में 450 बसें दौड़ रही हैं। अब 670 ई-बसों को मंजूरी दी गई है। महाराष्ट्र के लिए 240, गुजरात के लिए 250, गोवा के लिए 100 और चंडीगढ़ के लिए 80 ई-बसों को मंजूरी दी गई है। केरल और अन्य राज्यों के लिए भी ई-चार्जिंग स्टेशन मंजूर किए गए हैं।
भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम मंत्रालय के तहत भारी उद्योग विभाग अप्रैल, 2015 से फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्यूफैक्चरिंग (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (फेम इंडिया) योजना चला रहा है। यह योजना देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए बनाई गई है। एक अप्रैल, 2019 से तीन साल के लिए फेम इंडिया योजना के चरण दो का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस चरण का फोकस सब्सिडी के जरिए सार्वजनिक और साझा परिवहन का विद्युतीकरण करना है। इसके तहत करीब 7000 ई-बसें, 5 लाख ई-तिपहिया, 55,000 ई-चार पहिया यात्री कारें और 10 लाख ई-दोपहिया वाहनों को मंजूरी देना है।