देश में वन्यजीव-मानव संघर्ष में मारे गए नागरिकों के परिजनों को वाजिब मुआवजा नहीं मिल रहा है। एक नए अध्ययन के अनुसार परिजनों को औसतन 1,91,437 रुपये ही मिल रहे हैं। हरियाणा में यह सबसे कम मात्र 76,400 रुपये है, वहीं महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 8,73,995 रुपये।
वन्य क्षेत्रों के निकट रहने वाले करीब 5,196 परिवारों के बीच किए अध्ययन के आधार पर यह दावा सेंट्रल फॉर वाइल्ड लाइफ स्टडीज बंगलूरू ने किया है। इसमें शामिल प्रमुख अध्ययनकर्ता सुमित गुलाटी के अनुसार वन्यजीव-मानव संघर्ष में घायल होने पर भी केवल 6,185 रुपये औसतन दिए जा रहे हैं।
यह रवैया बदलना होगा ताकि वन्य जीव संरक्षण के प्रयास सफल हो सकें। जिन क्षेत्रों में ऐसे संघर्ष अक्सर हो रहे हैं, उनकी पहचान भी करनी होगी। गुलाटी के अनुसार मुआवजे की गणना वैल्यू ऑफ स्टेटिस्टिकल लाइफ सिद्धांत के आधार पर हो रही है जो श्रम बाजार पर आधारित है। यानी कोई व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में कितना पैसा कमा सकता है, उससे मुआवजा तय होता है।
जानकारों के अनुसार इससे आर्थिक-सामाजिक रूप से निचले पायदान पर जीने वाले नागरिकों को व्यापाक मुआवजा नहीं मिल पाता। अगर बेहतर मुआवजा मिलेगा तो संरक्षण के कामों को वे शत्रुता से नहीं देखेंगे।