कर्ज और नुकसान के बोझ तले दबी एयर इंडिया सरकार की मार से भी परेशान है। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही कंपनी का सरकार के कई महकमों पर काफी बकाया है। एयर इंडिया की यह बकाया राशि विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय पर है। इसमें हैरानी की बात यह है कि सरकारी विमानन कंपनी करीब 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज तले दबी है। सरकार इसे बेचने का असफल प्रयास भी कर चुकी है।
गुरुवार को लोकसभा में सांसद राम चरित्र निषाद के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय नगर विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने बताया कि आर्थिक तंगी का सामना कर रही एयर इंडिया का सरकार पर करोड़ों रुपए बकाया हैं। उन्होंने बताया कि 30 नवंबर, 2018 तक सरकार को एयर इंडिया का 1,000.62 करोड़ रुपए चुकाना है।
सिन्हा के मुताबिक यह पैसा स्पेशल एक्स्ट्रा सेक्शन फ्लाइट यानी एसईएसएफ के लिए चुकाना है। गौरतलब है कि एसईएसएफ को वीवीआईपी फ्लाइट्स भी कह सकते हैं, जिसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए जरूरत के मुताबिक व्यवसायिक जेट विमानों को सुइट में बदला जाता है। उन्होंने बताया कि नियमित तौर पर एयर इंडिया और नगर विमानन मंत्रालय उसका तकादा करता है, लेकिन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय उसे चुका नहीं रहे हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति की यात्रा और बचाव कार्यों में लगाई गए फ्लाइट्स के कई बिल तो दस साल से ज्यादा पुराने है और एक साल में इसमें तीन गुना इजाफा हो चुका है। रक्षा मंत्रालय पर 211.17 करोड़, कैबिनेट सचिवालय और पीएमओ पर 543.18 करोड़ और विदेश मंत्रालय पर 392.33 करोड़ रुपये बकाया है। इन विमानों का किराया रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय के कोष से चुकाया जाता है। इससे पहले पेंडिंग बिल्स का मुद्दा 2016 में सीएजी ने भी उठाया था।