मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बजट में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के सभी क्षेत्रों के बजट में बढ़ोतरी की गयी है। पिछले वर्ष जहां बजट 73599 करोड़ रुपये था, वह अब 79686 करोड़ रुपये पहुंच गया है। स्कूली व उच्च शिक्षा के लिए 44506.42 करोड़ रुपये है, जिसमें से स्कूली शिक्षा विभाग व साक्षरता के लिए 38980.67 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा विभाग को 5525.75 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
बजट के मुख्य बिंदू :
- वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूशन के लिए 50 करोड़ रुपये,प्रधानमंत्री गल्र्स हॉस्टल को 20 करोड का प्रावधान है।
-डीम्ड यूनि. को केंद्र द्वारा जारी होने वाली राशि के लिए 60 करोड़,नेशनल इंनिसिऐटिव ऑन स्पोट्र्स एंड वेलनेस के लिए एक करोड़ रुपये रखे गए हैं।
-केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हिमालय में डिजास्टर व क्लाइमेट चेंज पर होने वाली शोध के लिए दस करोड़ रुपये का प्रावधान है।
-कॉलेज व विवि में स्कॉलरशिप के लिए 320 करोड़, लोन लेने वाले छात्रों के लिए गारंटी व सब्सिडी के लिए 1950 करोड़, पीएम रिसर्च केलिए 75 करोड़ रखे गए हैं।
- डिजिटल इंडिया ई लर्निंग स्कीम में 497 करोड़, रिसर्च व इनोवेशन के लिए 315 करोड़, विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों की रैकिंग सुधारने के तहत नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैकिंग फ्रेमवर्क पर 5.41 करोड़ तो टीचर ट्रेनिंग पर 120 करोड़, ज्ञान प्रोजेक्ट में 25 करोड़ व स्किल पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
राज्यों के बजट पर चली कैंची
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- शिक्षण संस्थानों में भारतीय भाषाओं के प्रचार के लिए 285 करोड़ रुपये और नए प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर स्कूल खोलने के लिए सौ करोड़ रुपये तो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च पर 130 करोड़ रुपये व अन्य संस्थानों को 373 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
- यूनिवर्सिटी व कॉलेज के शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी के लिए सात सौ करोड़ तो राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान पर 13 सौ करोड़ रुपये रखे गए हैं।
- सर्व शिक्षा अभियान व राष्ट्रीय शिक्षा मिशन का बजट पहले 28251 करोड़ रुपये था, जिसमें इस वर्ष 29556 करोड़ रुपये देने का प्रावधान है।
- मिड डे मील के बजट में भी बड़ी राहत। 97 सौ से बढ़कर दस हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा।
- एकीकृत बाल विकास सेवाओं का बजट भी 16580 से बढ़कर पौने 21 हजार करोड़ रुपये पहुंचा।
- नेशनल अवार्ड फॉर टीचर केलिए 2.86 करोड़ रुपये तो अल्पसंख्यक व मदरसा के लिए 120 करोड़ का प्रावधान है।
राज्यों के बजट पर चली कैंची : बजट में राज्यों के बजट पर कैंची चल गयी है। पिछले वर्ष राज्य सरकारों को केंद्रीय बजट से मिलने वाला फंड जहां 2620.10 करोड़ रुपये था, जोकि इस 1745 करोड़ रुपये तक सिमट गया है। जबकि नॉर्थ ईस्टन एरिया में शिक्षा को केंद्र के बजट के हिस्से में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 1685.50 करोड़ रुपये था, जोकि इस वर्ष 2078 करोड़ पहुंच गया है।
रैगुलेटरी बॉडी का बजट भी बढ़ा
रैगुलेटरी बॉडी का बजट भी बढ़ा :
उच्च शिक्षा : - यूजीसी को 4691.94 करोड़ रुपये, एआईसीटीई को 485 करोड़ रुपये,आईआईटी को करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 7856 करोड़ रुपये, एनआईटी को 3440 करोड़ रुपये, आईआईएसईआर को 650 करोड़ रुपये, इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस को साढ़े चार सौ करोड़ रुपये, आईआईआईटी को 379 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
- स्कूली शिक्षा : - केंद्रीय विद्यालय संगठन को 4300 करोड़, नवोदय विद्यालय समिति को 27 सौ करोड़, एनसीईआरटी को 230 करोड़, सेंट्रल तिब्तन स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन को 54 करोड़ तो नेशनल बाल भवन को 18 करोड़ रुपये आवंटित हुआ है।
तकनीकी संग सामान्य शिक्षा का बजट बढ़ा : तकनीकी शिक्षा पर पिछले वर्ष 11070.44 करोड़ रुपये था जोकि अब 14404 करोड़ तो सामान्य शिक्षा का पिछला बजट 14152.17 करोड़ रुपये था, जोकि अब 14680.97 करोड़ रुपये का बजट मिला है। तकनीकी शिक्षा में सॉफ्टवेयर समेत अन्य उपकरणों को खरीदना का बजट करीब साढ़े सात करोड़ बढ़ाते हुए 101.73 करोड़ पहुंच गया था।