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जनगणना: 15 साल बाद पता चलेगी देश की प्रगति की वास्तविकता, विकसित राष्ट्र और सामाजिक न्याय की राह तय होगी

Sun, 05 Apr 2026 07:39 AM IST
Shubham Kumar अजीत खरे

सार

करीब 15 साल बाद जनगणना से पता चलेगा कि देश की प्रगति असल में कैसी है। यह शिक्षा, रोजगार, आमदनी, भाषा और प्रजनन के आंकड़ों से विकसित राष्ट्र की राह बताएगी। जाति और धर्म के डेटा सामाजिक न्याय सुधार में मदद करेंगे। शहरीकरण, आर्थिक असंतुलन, आबादी की बढ़त और प्रवासन पर नए बहस के रास्ते खुलेंगे। जनगणना परिसीमन, संसाधन वितरण और आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी प्रभाव डालेगी।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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करीब 15 साल बाद यह पता चलने वाला है कि देश की प्रगति की वास्तविक तस्वीर क्या है। देश के लोगों का रहन -सहन, शिक्षा, प्रजनन, भाषा, रोजगार, प्रवास, आमदनी के आंकड़े ही जहां देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पाने का रास्ता तय करेंगे, वहीं जाति, धर्म के आंकड़े सामाजिक न्याय के मौजूदा असंतुलन को दूर करने में सहायक होंगे। क्षेत्रीय विषमता व आर्थिक असंतुलन के सवालों का जवाब मिलेगा। जीडीपी ही नही सतत विकास के लक्ष्य नए सिरे से तय करने में जनगणना अहम भूमिका निभाएगी।

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इससे संसद और विधानसभा क्षेत्रों के नए परिसीमन रास्ता खुलेगा। यह प्रवासन, पहचान और आरक्षण से जुड़े मुद्दे उभरेंगे। वास्तव में देश के पहले जनगणना आयुक्त डब्लू डब्लू प्लाडेन ने (1881) पहली बार जनगणना को व्यवस्थित रूप से करा कर जो जवाब हासिल किए थे, उससे बड़े जवाब अब मौजूदा जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा कराई जा रही जनगणना से मिलेंगे।

यह चार प्रमुख नई चुनौतियां उभरेंगी
आबादी के जब आंकड़े आएंगे तो, यह सवाल उभरेगा कि आबादी की बढ़ती रफ्तार कम करने वाले राज्यों को संसाधनों के वितरण में इस आधार पर कोई प्रोत्साहन मिलेगा या नहीं। दक्षिण के राज्य अपनी तेजी प्रगति की एक बड़ी वजह आबादी कम करने के प्रयासों को बताते हैं। उत्तर बनाम दक्षिण राज्यों के बीच यह विवाद पहले से रहा है। अमीरी गरीबी में तेजी से बढ़ता अंतर भी एक बड़ी चुनौती है। देश में अब कितना शहरीकरण हुआ और गांव कितने आगे बढ़े इस पर भी नए आंकड़ों के परिपेक्ष्य में बहस होगी। पलायन व घुसपैठ पर चर्चा होगी।
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जाति के नए आंकड़े आने पर ओबीसी व एसएसी आरक्षण में नए सिरे बंटवारें व इसकी सीमा बढ़ाने की मांग उठेगी। यह भी चर्चा है कि महिला आरक्षण संबंधी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर जनगणना का इंतजार किए बिना लागू कर दिया जाए। इसके जरिए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। जब भाषा जानने व बोलने वालों की गिनती सामने आएगी तो भाषाई आधार पर नए राज्य बनाने की मांग जोर पकड़ सकती है। राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने व उस आधार पर राज्य विभाजन का सवाल पहले से ही है।

धर्म, जाति व भाषा के सवालों पर बहस न करने की हिदायत
जनगणना कर्मियों को यह हिदायत दी गई है कि कोई अपना धर्म या जाति न बताएं तो उसे उसी रूप में दर्ज करना होगा कि नहीं बताया। इस तरह के सवालों पर परिवार के साथ बहस में न पड़ें। यही नहीं भाषा के मामलें में भी संवेदनशीलता की जरूरत है। घर के प्रत्येक सदस्य की मातृभाषा को परिवार में बोली जाने वाली भाषा के साथ भ्रमित नहीं करना चाहिए। यदि घर का नौकर गैरेज में रहता है और परिवार द्वारा उसे सदस्य बताया गया तो गैरेज घर का अतिरिक्त कमरा माना जाएगा।

जीडीपी में योगदान
देश जब पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है तो इसमें बढ़ती शिक्षित, कुशल व सशक्त युवा पीढ़ी का बड़ा योगदान होगा। जनगणना में युवा शक्ति की ताकत व संख्या के आंकड़े मिलेंगे। मांग, उत्पादन, संसाधन, उद्योग कारोबार व रोजगार के तेजी से घूमते चक्र से जीडीपी में भी इजाफा होगा। वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। जीडीपी 2025-26 में 345.47 लाख करोड़ रुपये की मानी जा रही है।

वर्ष पहला चरण प्रश्नों की संख्या दूसरा चरण प्रश्नों की संख्या
1981 14 22
1991 24 23
2001 34 23
2011 35 29
2021 34 29
2027 33 -

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नोट :1921 की जनगणना कोविड के कारण नहीं हो पाई लेकिन दोनों चरणों के सवाल तैयार हो गए थे।

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