जनगणना के वक्त कुछ सवालों का जवाब नहीं मिलता है तो भी सरकार को पता चलेगा कि लोग कैसी जानकारियां बताना नहीं चाहते हैं। जनता निजता के तहत या किसी आशंका के चलते किन सवालों का जवाब नहीं देना चाहती है। खासकर आधार नंबर से लेकर बैंक खातों तक तमाम सवाल ऐसे हैं, जो पहली बार जनगणना में जोड़े गए हैं। इनको बताने को लेकर लोगों में हिचक हो सकती है।
महारजिस्ट्रार जनगणना कार्यालय की तरफ से जनगणनाकर्मियों को दी गई ट्रेनिंग में बताया गया है कि जनगणना के दौरान जिसका जवाब न मिले तो उस कॉलम को खाली छोड़ देना है। जवाब के लिए दबाव नहीं बनाना है। उस सवाल के जवाब के रूप में खाली कॉलम की तादाद यह बताएगी कि देश में कितने लोग अपना आधार नंबर और बैंक खातों को लेकर संवेदनशील हैं।
एक अधिकारी के मुताबिक, यह पहले से स्पष्ट है कि इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी और न इसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकता है, लेकिन फिर भी देश में इसे लेकर अपेक्षित जागरूकता का अभाव है। अधिकारी ने बताया कि दूसरी समस्या 40 सवालों की है। इस बार इसकी जानकारी देने में परिवार वालों को अच्छा खासा वक्त लगेगा। पिछली बार की जनगणना में कुल 29 सवाल पूछे गए थे।
आर्थिक स्थिति की भी मिल सकेगी जानकारी
जनगणना में मां-पिता का धर्म, जन्म स्थान भी पूछा जाएगा। अगर वह परिवार में नहीं हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी हो। जवाब में मां-पिता का धर्म और बच्चों का धर्म अलग-अलग हुआ तो इससे चलेगा कि कितने लोगों ने अंतर धार्मिक विवाह किया है। धर्मांतरण की स्थिति भी पता चलेगी। किन राज्यों या किस जिले में, किस आर्थिक स्तर के लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है।
किसी परिवार में कोई सदस्य अनुसूचित जाति का है और दूसरे की गैर-अनुसूचित जाति या गैर-अनुसूचित जनजाति है तो अंतर जातीय विवाह की स्थिति पता चलेगी। नहीं जवाब दिया तो वे बातें चिह्नित होंगी, जिसे लोग छिपाना चाहते हैं। जनगणना नियमों के मुताबिक, कोई नागरिक किसी सवाल का जवाब न दे तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। पर इससे पता चलेगा कि कौन-सी जानकारी वह सार्वजनिक नहीं करना चाहते।
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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाए जाने की आशंका
सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने के बारे में कोई एलान नहीं किया है, लेकिन जन्म स्थान, प्रवास, धर्म, जन्मतिथि, आधार, मतदाता पहचान पत्र की जानकारी जनगणना में मांगे जाने के निर्णय से इसकी आशंका जताई जा रही कि इसी डाटाबेस से एनपीआर तैयार हो सकता है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में एक गांव या ग्रामीण क्षेत्र या कस्बे या वार्ड या किसी शहर या शहरी क्षेत्र में एक वार्ड में सीमांकित क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करने वाले व्यक्तियों का विवरण होता है। एनपीआर पहली बार 2010 में तैयार किया गया था।