जनगणना 2027 की प्रक्रिया के बीच भारत के महापंजीयक (आरजीआई) ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जनसंख्या के अस्थायी आंकड़े या जनगणना से जुड़ी कोई भी जानकारी प्रेस के साथ साझा नहीं करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि अगले आदेश तक जनगणना के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किसी भी स्तर पर नहीं किया जाए। यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब देश में जनगणना की तैयारियां चल रही हैं और कई क्षेत्रों में मकानों की सूची बनाने का काम पूरा हो चुका है।
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देशों का पालन करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी गोपनीय है और जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सुरक्षित है। इस कानून की धारा 15 के अनुसार, जनगणना के रिकॉर्ड का निरीक्षण नहीं किया जा सकता और न ही उन्हें अदालत में सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है। आरजीआई ने कहा है कि जब तक उसके कार्यालय से आगे के निर्देश नहीं आते, तब तक अस्थायी जनसंख्या आंकड़े या परिवारों से जुटाई गई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
जनगणना के आंकड़े जारी करने पर रोक क्यों लगाई गई?
आरजीआई के निर्देश के मुताबिक, जनगणना के दौरान जुटाए गए आंकड़ों को कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी अधिकारी अपनी ओर से जारी नहीं कर सकता। इसमें जनसंख्या के अस्थायी आंकड़े और परिवारों के शेड्यूल में दर्ज दूसरी जानकारियां भी शामिल हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे इन आंकड़ों को प्रेस के साथ साझा न करें और न ही किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल करें। यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। इसका मकसद जनगणना के रिकॉर्ड की गोपनीयता बनाए रखना और आंकड़ों के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है।
डिजिटल जनगणना में आंकड़े कैसे जुटाए जा रहे हैं?
जनगणना 2027 डिजिटल तरीके से कराई जा रही है। इसके लिए गणनाकर्मी और पर्यवेक्षक अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके जानकारी जुटा रहे हैं और उसे केंद्रीय सर्वर पर भेज रहे हैं। हालांकि, तकनीकी समस्या, इंटरनेट कनेक्शन में परेशानी या दूसरी मैदानी दिक्कतों के कारण कहीं कागज पर जानकारी जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मामलों में कागजी फॉर्म में दर्ज आंकड़ों को बाद में मोबाइल एप्लिकेशन में दर्ज करना होगा। अगर गणनाकर्मी ऐसा नहीं कर पाता, तो चार्ज अधिकारी और प्रधान जनगणना अधिकारी जैसे वरिष्ठ अधिकारी विशेष पोर्टल पर उपलब्ध डेटा एंट्री मॉड्यूल के जरिये जानकारी दर्ज कराने में मदद करेंगे।
कागज पर जुटाए गए आंकड़ों को कितने दिन में दर्ज करना होगा?
आरजीआई ने निर्देश दिया है कि कागज पर जानकारी जुटाए जाने वाले सभी गणना ब्लॉकों का डेटा संबंधित अवधि पूरी होने के सात दिनों के भीतर दर्ज किया जाए। जरूरत पड़ने पर इसके लिए अलग-अलग गणनाकर्मियों के हिसाब से कार्यक्रम भी बनाया जा सकता है। जनगणना के दस्तावेजों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। रिकॉर्ड रूम में आग, बाढ़, बारिश, धूल और चूहों से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। सहायक निदेशक या उससे वरिष्ठ पद के अनुभवी अधिकारी को रिकॉर्ड रूम का प्रभारी बनाया जाएगा। उसकी जिम्मेदारी होगी कि सभी दस्तावेज तय सूची और भेजे जाने के विवरण के अनुसार प्राप्त हों।
जनगणना कब और किन राज्यों में होगी?
आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना है। इसे दो चरणों में कराया जा रहा है। पहले चरण में मकानों की सूची और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाती है, जबकि दूसरे चरण में आबादी की गणना होगी। साल 2021 में होने वाली जनगणना कोरोना महामारी के कारण टाल दी गई थी। अब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस काम के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों के अलावा बाकी हिस्सों में आबादी की गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच होगी। यह कार्यक्रम विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तय किया गया है। मणिपुर में मकानों की सूची बनाने का काम टाल दिया गया है। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 1 से 30 सितंबर के बीच हुई। देश के बाकी हिस्सों में मकानों की सूची बनाने का काम अगले साल फरवरी में शुरू होने की संभावना है। इसमें परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति, पलायन और प्रजनन से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी।