सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तमिलनाडु देश के लिए एक मॉडल है और यहां के चुनावों का सफल आयोजन एक बड़ी उपलब्धि है। यह बयान राज्य में चुनावी व्यवस्था की मजबूती और मतदाताओं की भागीदारी को रेखांकित करता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चेन्नई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तमिलनाडु के चुनावी इतिहास और आगामी चुनावों से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तमिलनाडु में पार्टियों ने विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराने का सुझाव दिया है और इस पर सभी कारकों पर विचार करने के बाद फैसला लिया जाएगा।
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उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का 'चुनाव के चरणों' को लेकर निर्णय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद ही पता चलेगा। उन्होंने राज्य के 'गौरवशाली लोकतांत्रिक अतीत' का उल्लेख करते हुए प्राचीन 'कुडवोलाई' प्रणाली का भी जिक्र किया, जो दर्शाता है कि लोकतंत्र की जड़ें तमिलनाडु में कितनी गहरी हैं।
निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया का आश्वासन
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जिक्र कर चुनाव आयोग के 'पारदर्शी उद्देश्य' पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी योग्य व्यक्ति को मतदान प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जाएगा और न ही किसी अयोग्य व्यक्ति को शामिल होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हों। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि तमिलनाडु में सभी 75,000 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
नई चुनावी पहलें और मतगणना प्रक्रिया
चुनाव आयोग की ओर से तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की गई। इनमें से एक प्रमुख पहल यह है कि पोस्टल बैलेट की गिनती इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की मतगणना से दो चरण पहले की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यह भी स्पष्ट किया गया कि वीवीपैट की गिनती अनिवार्य रूप से की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मतगणना समाप्त होने के बाद भी, कोई भी उम्मीदवार एक निश्चित शुल्क का भुगतान करके अगले सात दिनों के भीतर ईवीएम के वोटों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान करवा सकता है। यह कदम चुनावी प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता को और बढ़ाएगा।