खून-पेशाब की जांच करने वाली किट, मशीनें और अन्य मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए नियम सख्त किए जाएंगे। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इस संबंध में नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत उपकरणों के जोखिम के आधार पर लाइसेंस और निर्माण स्थलों की जांच के नियम तय होंगे।
बीमारी का पता लगाने के लिए खून-पेशाब की जांच कराते हैं तो उसकी रिपोर्ट काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और सामग्री कितनी भरोसेमंद हैं। ऐसी जांच किट और मशीनें बनाने वाली कंपनियों के लिए अब लाइसेंस लेने और गुणवत्ता से जुड़े नियमों को सख्त किया जा रहा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इन-विट्रो डायग्नोस्टिक यानी शरीर से बाहर लिए गए नमूनों की जांच करने वाले उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए गाइडलाइन जारी किया है। इसमें बताया गया है कि कंपनियों को लाइसेंस के लिए कौन से दस्तावेज देने होंगे और उपकरण के जोखिम के आधार पर निर्माण स्थल की जांच कैसे होगी।
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जांच किट ही नहीं, मशीनें और जांच में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी दायरे में
गाइडलाइन में केवल जांच किट ही नहीं, बल्कि जांच में इस्तेमाल होने वाले रसायन, नमूने रखने के बर्तन, उपकरण, मशीनें और उनसे जुड़े सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं। इनका इस्तेमाल इंसानों या जानवरों के शरीर से लिए गए नमूनों की जांच करने और बीमारी का पता लगाने में किया जाता है। कंपनियों को लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय उपकरण की जानकारी, उसकी सुरक्षा और काम करने की क्षमता से जुड़े प्रमाण, गुणवत्ता व्यवस्था और जांच से जुड़े दस्तावेज देने होंगे।
कम जोखिम से लेकर ज्यादा जोखिम तक, चार श्रेणियां
गाइडलाइन में जांच उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी ए में कम जोखिम वाले और श्रेणी डी में सबसे ज्यादा जोखिम वाले उपकरण आते हैं। श्रेणी बी और सी इनके बीच के जोखिम को दर्शाती हैं। उपकरण किस श्रेणी में आता है, उसी के अनुसार लाइसेंस देने और निर्माण स्थल की जांच की प्रक्रिया तय होगी।
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कम जोखिम वाली श्रेणी ए के उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए लाइसेंस मिलने से पहले निर्माण स्थल का निरीक्षण जरूरी नहीं है। हालांकि, लाइसेंस मिलने के 120 दिन के भीतर पंजीकृत अधिसूचित संस्था को इसका ऑडिट करना होगा। श्रेणी बी के उपकरणों के निर्माण स्थल का ऑडिट आवेदन के 90 दिन के भीतर किया जाना है। वहीं, श्रेणी सी और डी के उपकरणों के लिए लाइसेंस देने से पहले निर्माण स्थल का निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए आवेदन के 60 दिन के भीतर निरीक्षण की प्रक्रिया बताई गई है।