जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सेना प्रमुख
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भारत के मौजूदा सर्वोच्च सैन्य अधिकारी जनरल अनिल चौहान ने भारत की सुरक्षा प्रणाली पर बात की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती तकनीक की दुनिया में हमें अपने हवाई सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करना होगा।
पुणे में आयोजित जय से विजय सेमिनार में बात करते हुए, जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने आने वाली और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारत की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि जीत सिर्फ कहने से घोषित नहीं होती। जैसा कि हमारे पड़ोस में कुछ लोगों ने किया है, बल्कि सबूतों के जरिए दिखाई जाती है, जैसा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाया था। रणनीति माहौल पर ज़ोर देते हुए, जनरल चौहान ने कहा कि अगले दशक के लिए भारत की डिफेंस पोजीशन को बदलते सुरक्षा माहौल के यथार्थवादी मूल्यांकन से आकार मिलना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अभी, अगले दशक के लिए भारत की रक्षा व्यवस्था को इस बात का गंभीरता से आकलन करके आकार मिलना चाहिए कि आगे क्या है, किस तरह की चुनौतियां हैं यहा हमें नहीं पा है। और मेरा मानना है कि यह तेज़ी से प्रतिस्पर्धात्मक, टकराव वाला, लड़ाकू, नाज़ुक और टेक्नोलॉजिकली बहुत हानिकारक होता जा रहा है।
इससे पहले, जनरल चौहान ने कहा कि तेज़ी से बदलते ग्लोबल ऑर्डर में स्थाई दोस्तों या दुश्मनों के बारे में अंदाज़े भरोसे लायक नहीं रह गए हैं, और कहा कि भारत को ज़रूरत पड़ने पर अकेले काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
'जय से विजय' थीम के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि आज के समय में, जीत सिर्फ़ बात करने या प्रतीकात्मक दावों पर नहीं टिक सकती, बल्कि दिखाए गए सबूत और प्रमाणित किए जा सकने वाले नतीजों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि सिर्फ़ आधारभूत संरचना का नष्ट होना या एयरफ़ील्ड को नुकसान पहुंचना ही पक्की जीत नहीं है।