सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की शिकायतों को दबाया जा रहा है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर मचे बवाल के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्थान को गड़बड़ी का प्रतीक बना दिया है। उन्होंने दावा किया कि आज की युवा पीढ़ी यानी जेन जी प्रधानमंत्री के अहंकार को चकनाचूर कर देगी।
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क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर हिंदी में एक पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को लेकर इतने गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस साल 18.5 लाख छात्र परीक्षाओं में शामिल हुए थे। पिछले एक हफ्ते से छात्र ऑन-स्क्रीन मार्किंग में गलतियों और मूल्यांकन में गड़बड़ियों की शिकायत कर रहे हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि इन शिकायतों को अनसुना किया जा रहा है और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।
कांग्रेस नेता ने एक 17 साल के छात्र का जिक्र किया जिसकी उत्तर पुस्तिका का गलत मूल्यांकन हुआ था। राहुल ने कहा कि जब उस छात्र ने न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया का सहारा लिया, तो उसे मदद मिलने के बजाय गालियां दी गईं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के आईटी सेल ने उस छात्र को देशद्रोही, 'सोरोस एजेंट' और 'डीप स्टेट' का हिस्सा बता दिया। राहुल ने कहा कि जब एक बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज उठाता है, तो भाजपा उसे गद्दार कहती है।
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राहुल गांधी ने आगे कहा कि सच तो यह है कि मोदी सरकार युवाओं और जेन जी से डरती है क्योंकि वे अब सवाल पूछने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी सवाल पूछने की हिम्मत करता है, यह सरकार उसे बदनाम करती है और डराकर कुचल देती है। राहुल ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि यही युवा आपका अहंकार तोड़ेंगे।
शिक्षा मंत्रालय उठाए बड़े कदम
इस विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय ने रविवार को बड़ा कदम उठाया। मंत्रालय ने कहा कि सीबीएसई अपने पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को ठीक करने के लिए आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की मदद लेगा। यह फैसला छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद लिया गया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने निर्देश दिए हैं कि आईआईटी के प्रोफेसरों की टीमें उन सभी तकनीकी मुद्दों की जांच करें जो इस साल सामने आए हैं। यह टीम पोर्टल की स्थिरता और सर्वर की क्षमता में सुधार करेगी। प्रधान ने कहा कि छात्रों का हित सबसे जरूरी है और सीबीएसई को एक पारदर्शी सिस्टम बनाना चाहिए। उन्होंने शनिवार को सीबीएसई से इस मामले पर पूरी रिपोर्ट भी मांगी थी।