सीबीएसई के सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को 12वीं में 75% और एससी, एसटी, दिव्यांग के लिए 65% का अनिवार्य पात्रता मापदंड है। यह नियम पूरा करने पर ही सीट पक्की होगी। जेईई एडवांस की आयोजक संस्थान आईआईटी रुड़की के मुताबिक, विद्यार्थियों को सीट उनकी रैंक के आधार पर आवंटित की जाएगी।
सीबीएसई के विद्यार्थियों को आईआईटी व एनआईटी में दाखिले के लिए 15 जुलाई तक पात्रता मापदंड स्कोर कार्ड जमा करना होगा। जोसा काउंसलिंग में पात्रता मापदंड के नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। सिर्फ समय सीमा में छूट दी गई है।
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पुनर्मूल्यांकन आवेदन कल तक
सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन आवेदन की तारीख छह से बढ़ाकर सात जून मध्यरात्रि तक कर दी है। आईआईटी रुड़की ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि कक्षा 12वीं में निर्धारित न्यूनतम अंक नहीं हासिल करने वाले अभ्यर्थी भी फिलहाल जारी जेईई (एडवांस्ड) काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं और उनकी रैंक के आधार पर सीट आवंटित की जाएगी।
इस वर्ष राष्ट्रीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाले आईआईटी रुड़की ने कहा कि सामान्य, ओबीसी-एनसीएल और ईडब्ल्यूएस वर्ग के ऐसे छात्र जिनके 12वीं में 75 प्रतिशत से कम अंक हैं, तथा एससी, एसटी और दिव्यांग (PwD) वर्ग के वे छात्र जिनके 65 प्रतिशत से कम अंक हैं, वे अभी अपनी पसंद (चॉइस फिलिंग) दर्ज कर सकते हैं। संस्थान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी पोस्ट में कहा, 'आप वर्तमान में अपनी पसंद भरने के पात्र हैं और आपकी जेईई रैंक के आधार पर सीट आवंटित की जाएगी।'
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CBSE मूल्यांकन विवाद के बीच आया स्पष्टीकरण
आईआईटी में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए जेईई (एडवांस्ड) के तहत वर्तमान नियमों के अनुसार अभ्यर्थियों को या तो 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होते हैं या अपनी बोर्ड परीक्षा में शीर्ष 20 प्रतिशत छात्रों में शामिल होना होता है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद जारी है। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खाती, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। छात्रों का कहना है कि कथित गड़बड़ियों का असर उनके अंकों पर पड़ा हो सकता है, जिससे उच्च शिक्षा और कॉलेज प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं।