सीबीआई ने 15 अक्तूबर, 2018 को बिजनेसमैन सतीश बाबू साना की शिकायत के आधार पर राकेश अस्थाना के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले में अस्थाना की विशेष जांच टीम ने साना से पूछताछ की थी।
साना का आरोप था कि दुबई स्थित एक बिचौलिए ने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत के बदले अपने अस्थाना के साथ खास संबंधों की मदद से उसे राहत दिलाने का प्रस्ताव दिया था। तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के निर्देश पर अस्थाना की टीम के एक डिप्टी एसपी को गिरफ्तार कर लिया था।
अस्थाना ने वर्मा पर ही साना से करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने समेत कई अन्य गंभीर आरोप वाली शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजी थी। ऐसे में इस विवाद को ‘सीबीआई बनाम सीबीआई’ नाम से चर्चा मिलने पर सरकार ने अस्थाना और वर्मा, दोनों को अवकाश पर भेजकर एम. नागेश्वर राव को कार्यवाहक निदेशक बना दिया था।
अस्थाना बनने वाले थे नए निदेशक
भ्रष्टाचार के आरोपों से पहले अस्थाना अगले सीबीआई निदेशक बनने की कतार में थे, जिसके लिए नामों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की तीन सदस्यीय कमेटी को नए निदेशक का का चयन 31 जनवरी, 2019 को वर्मा की सेवानिवृत्ति से पहले ही करना था। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप के बाद अस्थाना के अगला निदेशक बनने की उम्मीद धूमिल हो गई है।