पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के पांच मामलों की जांच सीबीआई ने मुंबई पुलिस से ले ली है। बुधवार को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसी की स्पेशल अपराध शाखा ने बुधवार देर शाम मामले दर्ज किए। अधिकारियों ने बताया कि परमबीर सिंह के खिलाफ मुंबई और ठाणे में दर्ज पांचों मामलों को सीबीआई ने अपने मैनुअल के मुताबिक फिर से दर्ज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को सुनवाई करते हुए इन मामलों की जांच सीबीआई को हस्तारिंत करने के निर्दश दिए थे। न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुन्द्रेश की पीठ ने कहा था कि लोगों में राज्य पुलिस के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए इस जांच की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ अगर आगे एफआईआर दर्ज की जाती है, तो उसे सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह परमबीर सिंह का निलंबन रद्द नहीं कर रही है।
पुलिस अधिकारियों को सीबीआई से सहयोग करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज पांच आपराधिक मामले निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को हस्तांतरित किए जाएं। अदालत ने राज्य पुलिस से इन केसों को एक हफ्ते के भीतर सीबीआई को सौंपने और एजेंसी के साथ सहयोग करने को कहा था।
ठाकरे सरकार के लिए झटका
शीर्ष अदालत के इस आदेश को राज्य सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। परमबीर सिंह के बयानों के कारण ही राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। परमबीर ने देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली करवाने का आरोप लगाया था।
मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। इसमें परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने कथित तौर पर एंटीलिया सुरक्षा उल्लंघन मामले में मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे को मुंबई के बार और रेस्तरां से एक महीने में कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही करने के लिए कहा था। इस आरोप के बाद अनिल देशमुख को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।