शारदा चिट फंड मामले में तृण्मूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस बार सीबीआई ने तृण्मूल के पूर्व राज्यसभा सांसद कुणाल घोष को सम्मन जारी कर दस फरवरी को शिलांग के सीबीआई ऑफिस में हाजिर होने का आदेश दिया है।
तृण्मूल कांग्रेस की अध्यक्ष और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी तरह के मामले में धरने पर बैठ गई थीं और उन्होंने केंद्र सरकार पर सीबीआई के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया था। साथ ही ममता ने कहा था कि मोदी सरकार की एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी है और उन्हें जाना होगा।
चिट फंड स्कीम
चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए। जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए।
इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं। नियम के मुताबिक ये स्कीम किसी संस्था या फिर व्यक्ति के जरिए आपसी संबंधियों या फिर दोस्तों के बीच चलाया जा सकता है लेकिन अब चिट फंड के स्थान पर सामूहिक सार्वजनिक जमा या सामूहिक निवेश योजनाएं चलाई जा रही हैं।