सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच मचे घमासान में अस्थाना की मुसीबत बढ़ने जा रही है। मंगलवार को उन्हें हाईकोर्ट से भले ही थोड़ी सी राहत मिल गई है, लेकिन सीवीसी और डीओपीटी, सोमवार तक इस मामले में उन्हें कोई बड़ा झटका दे सकते हैं। इनके पास अधिकारिक तौर पर मामले की जानकारी, एफआईआर की कॉपी और दूसरे दस्तावेज पहुंच चुके हैं। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट में डीएसपी देवेंद्र कुमार की पेशी के दौरान इस केस में जो नई धाराएं जोड़ी हैं, उसका सीधा मतलब है कि राकेश अस्थाना का मामला अब लंबा खिंचने जा रहा है।
मंगलवार को कोर्ट से राकेश अस्थाना को जो राहत मिली है, उसमें केवल सर्च और गिरफ्तारी से बचाव की बात है। केस, ज्यों का त्यों चलता रहेगा और जांच भी जारी रहेगी। दूसरी ओर, डीएसपी देवेंद्र कुमार को लेकर सीबीआई का जो व्यवहार कोर्ट में दिखा, उससे लग रहा था कि इस केस में जांच एजेंसी बहुत गहराई तक जाएगी। पेशी के वक्त यह कहीं से भी नहीं दिखाई दिया, जिससे यह लगा हो कि जांच एजेंसी अपने डीएसपी के साथ सरलता से पेश आ रही है। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि इस एफआईआर में आईपीसी की कुछ नई धाराएं जोड़ी गई हैं। इनमें धारा-384, 388, 389, 467 और 471 शामिल है। पेशी के बाद देर शाम को डीएसपी देवेंद्र कुमार सस्पेंड भी कर दिए गए।
कोर्ट में यह बात भी सामने आई कि सीबीआई ने देवेन्द्र से ख़ाली पेपर पर हस्ताक्षर लिए हैं। इस बारे में सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, यह सब झूठ है। कहीं कोई साइन नहीं कराया गया है। दिन में खबरें यह भी आती रही कि स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना से उनके सभी अधिकार वापस ले लिए गए हैं। इसके अलावा ये भी सुनाई पड़ा कि उन्हें एसआईटी हेड से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि शाम को सीबीआई की नियमित ब्रीफिंग में कहा गया कि अभी ऐसा कुछ नहीं है।
सीबीआई ने इस बाबत कोई आदेश जारी नहीं किया है। अस्थाना के पास विजय माल्या और अगस्ता वेस्टलैंड जैसे अहम केसों की जांच है। सीबीआई की निगाह अब डीओपीटी के कदम पर टिक गई है। बताया जा रहा है कि अस्थाना जिन मामलों की जांच कर रहे थे, उन्हें किसी दूसरे अधिकारी के सुपुर्द करने की तैयारी भी हो रही है। हो सकता है कि एक-दो दिन में अप्रत्यक्ष तौर पर अस्थाना से सभी अहम केसों की फाइलें वापस ले ली जायें।