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सीबीआई में बड़ा फेरबदल, आलोक वर्मा ने किए 5 अफसरों के तबादले

Thu, 10 Jan 2019 05:13 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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alok verma pti - फोटो : PTI
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सीबीआई में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने पांच अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया है। इनमें जेडी अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गाबा, जेडी मुरुगेसन और एडी एके शर्मा के नाम शामिल हैं। वहीं जानकारी के मुताबिक अनीस प्रसाद डिप्टी डायरेक्टर के पद पर बने रहेंगे। जबकि केआर चौरसिया स्पेशल यूनिट-1 (निगरानी रखने वाली इकाई) का नेतृत्व करेंगे।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक वर्मा ने फिर से सीबीआई डायरेक्टर का पदभार ग्रहण कर लिया है। पहले ही दिन उन्होंने बड़ा फैसला लिया। आलोक वर्मा ने एम नागेश्वर राव के बतौर निदेशक अल्प अवधि में वर्मा के कई नजदीकी अधिकारियों के तबादला के आदेश को रद्द कर दिया है। पहले ही कयास थे कि वर्मा इन्हें वापस बहाल कर सकते हैं। इसके अलावा विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दायर एफआईआर की जांच में तेजी आ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सलेक्ट कमेटी के फैसले तक वर्मा को बतौर निदेशक किसी भी नीतिगत फैसले से दूर रहने को कहा है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक एफआईआर दर्ज करना और तबादले करना रुटीन मामला है ना कि नीतिगत फैसला।
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प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा में विपक्षी दल या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता की सलेक्ट कमेटी सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति संबंधि फैसला करती है। अलोक वर्मा के केस में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस कि जगह जस्टिस ए.के. सिकरी, प्रधानमंत्री मोदी और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे फैसला लेंगे। सीबीआई डायरेक्टर अलोक वर्मा के मुद्दे पर सलेक्ट कमेटी की मीटिंग में फैसला होना है।  

हालांकि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का सीबीआई पर परीवेक्षिय अधिकार (सुपरवायजरी पावर) वर्मा के इन फैसलों पर अड़ंगा लगा सकती है। सीबीआई के एक पूर्व निदेशक ने बताया कि वर्मा के लिए गए किसी भी फैसले पर सुप्रीम कोर्ट और सीवीसी की तलवार लटकती रहेगी। क्यूंकि कई रुटीन फैसले को नीतिगत फैसला मानकर चुनौती दी जा सकती है। सीबीआई में चर्चा है कि वर्मा के बचे हुए कार्यकाल में ऐजेंसी में कई नए समीकरण बन सकते हैं।  

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आपसी आरोप प्रत्यारोपों के चलते ही 23 अक्टूबर को सरकार ने दोनों को उनके सभी अधिकार छीन कर छुट्टी पर भेज दिया था। मीट व्यापारी मोईन कुरैशी के मामले में घूस लेने केआरोप में अस्थाना के खिलाफ सीबीआई ने ही एफआईआर दर्ज किया है। 

लेकिन वर्मा के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं बल्कि अस्थाना की ओर से सीवीसी और कैबिनेट सचिव को लिखी शिकायत है। इसके अलावा विजय माल्या जैसे मामले में चल रही जांच में अस्थाना के अधिकारों पर कैंची चल सकती है। माल्या मामले की जांच अस्थाना की अगुवाई में ही चल रही है।
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