सीबीआई ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के अध्यक्ष मोंटू एम पटेल के परिसरों पर छापेमारी की है। अधिकारियों ने बताया कि मोंटू एम पटेल पर फार्मेसी कॉलेजों के निरीक्षण और अनुमोदन प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए मामला दर्ज किया गया है।
पटेल के खिलाफ यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच (पीई) के निष्कर्षों के आधार पर की गई है। जांच के दौरान पता चला था कि उन्होंने कॉलेजों को मंजूरी देने में कथित तौर पर भ्रष्टाचार, नियंत्रण और हेरफेर किया। सीबीआई ने उनके खिलाफ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव की शिकायत के आधार पर जांच और छापेमारी की कार्रवाई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में फार्मेसी कॉलेजों द्वारा मान्यता प्राप्त करने के तरीकों की जांच की, जिसमें तय नियमों का उल्लंघन और पारदर्शिता की कमी सामने आई।
अधिकारियों ने बताया कि आरोप है कि मोंटू पटेल के कार्यकाल में 2023-24 में 391वीं कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। इन बदलावों के क्रम में उन्होंने भौतिक निरीक्षण को पूरी तरह से बंद कर दिया। और इसके स्थान पर मानक निरीक्षण प्रारूप (एसआईएफ) के ऑनलाइन आवेदनों को लागू किया गया तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निरीक्षण किए जाने की व्यवस्था की गई।
अधिकारियों ने बताया कि 24 अप्रैल से 5 मई, 2023 तक गूगल लिंक के जरिए कॉलेजों की मान्यता के आवेदन आमंत्रित किए गए। इस दौरान कुल 908 आवेदन प्राप्त हुए और इनमें से 870 को ऑनलाइन निरीक्षण के लिए चुना गया। सीबीआई ने कहा कि ऑनलाइन निरीक्षण में घालमेल का सबसे बड़ा उदाहरण अयोध्या स्थित रामेश्वर प्रसाद सत्य नारायण महाविद्यालय का मामला है।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि निरीक्षकों की नकारात्मक रिपोर्ट के बावजूद पटेल की अध्यक्षता वाली कार्य समिति ने कम से कम छह कॉलेजों- एसएसडी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, गगन कॉलेज ऑफ फार्मेसी, शांति देवी जैन डिग्री कॉलेज, हेवर्ड कॉलेज ऑफ फार्मेसी, वीर शिवाजी कॉलेज ऑफ फार्मेसी और सुभावती कॉलेज ऑफ फार्मेसी को मंजूरी दे दी।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि मोंटू कुमार पटेल ने कार्य समिति के अज्ञात सदस्यों के साथ आपराधिक साजिश रचते हुए खुद या अपने गुर्गों के लिए अनुचित लाभ प्राप्त करने के बदले में इन संस्थाओं के पक्ष में मंजूरी दी।