सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना आज भी अपने पदों पर हैं, उन्हें केवल छुट्टी पर भेजा गया है।कुछ मीडिया समूहों और जनता के बीच यह संदेश जा रहा था कि उक्त दोनों अफ़सरों को इनके पदों से हटा दिया गया है।
सीबीआई प्रवक्ता ने गुरुवार शाम को इन खबरों का खंडन करते हुए बताया कि दोनों अफ़सर सिर्फ़ छुट्टी पर भेजे गए हैं।उन्हें पहले की भांति वेतन और दूसरे भत्ते मिलते रहेंगे। इन्हें छुट्टी पर इसलिए भेजा गया है कि ताकि सीवीसी द्वारा गठित जांच कमेटी इन अफ़सरों पर लगे आरोपों की निष्पक्षता से जांच कर सकें। जांच एजेंसी के रिकॉर्ड में वे आज भी अपने पदों पर हैं, लेकिन वे अपनी ड्यूटी नहीं कर सकेंगे।
बता दें कि जब इन दोनों अफ़सरों को छुट्टी पर भेजा गया तो यह भ्रम फैल गया कि उन्हें सीबीआई से हटा दिया गया है।यहां तक कि कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कुछ इसी तरह का बयान जारी कर दिया।
इसी वजह से सीबीआई प्रवक्ता को दोनों अफ़सरों की स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी वीरवार को एक पत्रकारवार्ता में कहा कि मुझे टीवी व दूसरी जगह से खबर मिल रही थी कि सीबीआई डॉयरेक्टर को रात में एक बजे हटाया गया है और उसी तरीके से जैसे जिस आदमी के ऊपर चार्जेज थे यानी स्पेशल डॉयरेक्टर, उसको छुट्टी पर जाने के लिए कहा गया है।
अगर सरकार उन्हें हटाना चाहती थी या उनके ऊपर कोई शिकायत थी, तो दो महीने, तीन महीने, चार महीने में कभी भी प्रधानमंत्री मोदी कमेटी की बैठक बुला सकते थे।इस मामले में सीवीसी पर भी इतना दबाव बनाया गया कि उन्हें पहली बार टी.वी पर आकर यह एक्सप्लेनेशन देना पड़ा कि उन्हें भी अधिकार है छुट्टी पर भेजने का और सुपरवाईज करने का।
यह बात सही है कि सीवीसी को सुपरविजन करने का अधिकार है, वो भी उस केस के बारे में, जो केस उनको रेफर किया जाता है।किसे ट्रांसफर करना है या किसको रखना है, ये अधिकार उनको नहीं है।