अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआई का कहना है कि 2004 में यूपीए सरकार की वापसी के बाद इस डील की स्थिति पूरी तरह से बदल गई। 2004 में जैसे ही यूपीए सरकार सत्ता में आई, पीएमओ, एसपीजी, एयरफोर्स और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी तत्काल अगस्ता वेस्टलैंड को लाभ पहुंचाने वाले वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों के लिए अनिवार्य सेवा की अधिकतम सीमा को बदलने के लिए तैयार हो गए।
सीबीआई का आरोप है कि पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एसपी त्यागी ने इस सौदे का रास्ता साफ करने के लिये मानकों को घटा दिया। त्यागी ने हेलीकॉप्टरों की उड़ान की क्षमता को 6000 मीटर से घटाकर 4500 कर दिया। उन्होंने 4500 मीटर की ऊंचाई को अनिवार्य और 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने की क्षमता को जरूरी कर दिया था, जबकि पहले 6000 मीटर तक उड़ान भरने की क्षमता अनिवार्य थी।
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इसके साथ ही हेलीकॉप्टर बनाने वाली फिनमेकेनिका कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए इस सौदे में यह भी कहा गया कि हेलीकॉप्टर कम से कम दो इंजन वाला होना चाहिए। यानी उसमें ज्यादा इंजन भी हो सकते हैं। कंपनी के अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर में तीन इंजन थे तो वह इस शर्त को पूरा करती थी।