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CBI ने कहा- UPA सरकार में बदले गए थे हेलीकॉप्टर की क्षमता के मानक

Sat, 14 Oct 2017 01:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआई का कहना है कि 2004 में यूपीए सरकार की वापसी के बाद इस डील की स्थिति पूरी तरह से बदल गई। 2004 में जैसे ही यूपीए सरकार सत्ता में आई, पीएमओ, एसपीजी, एयरफोर्स और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी तत्काल अगस्ता वेस्टलैंड को लाभ पहुंचाने वाले वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों के लिए अनिवार्य सेवा की अधिकतम सीमा को बदलने के लिए तैयार हो गए। 
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सीबीआई का आरोप है कि पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एसपी त्यागी ने इस सौदे का रास्ता साफ करने के लिये मानकों को घटा दिया। त्यागी ने हेलीकॉप्टरों की उड़ान की क्षमता को 6000 मीटर से घटाकर 4500 कर दिया। उन्होंने 4500 मीटर की ऊंचाई को अनिवार्य और 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने की क्षमता को जरूरी कर दिया था, जबकि पहले 6000 मीटर तक उड़ान भरने की क्षमता अनिवार्य थी।

पढ़ें: अगस्ता डील: त्यागी ने घसीटा मनमोहन सिंह का नाम

इसके साथ ही हेलीकॉप्टर बनाने वाली फिनमेकेनिका कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए इस सौदे में यह भी कहा गया कि हेलीकॉप्टर कम से कम दो इंजन वाला होना चाहिए। यानी उसमें ज्यादा इंजन भी हो सकते हैं। कंपनी के अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर में तीन इंजन थे तो वह इस शर्त को पूरा करती थी।
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1999 तक एमआई 8 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाता था

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
बता दें कि वीवीआईपी यात्रा के लिए 1999 तक एमआई 8 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाता था। यह हेलीकॉप्टर वीवीआईपी को लद्दाख या उससे ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में नहीं ले जा सकते थे, इसलिए सरकार इसे बदलना चाहती थी।

सरकार ऐसा हेलीकॉप्टर खरीदना चाहती थी जो 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सके। इसके लिए सरकार ने टेंडर जारी किया था, जिसमें 11 कंपनियों ने टेंडर भरा था। सीबीआई के मुताबिक 31 अक्टूबर 2004 को एसपी त्यागी के वायुसेना अध्यक्ष बनने की घोषणा हुई।

जब वह एक जनवरी 2005 को एयर चीफ मार्शल बने तो हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी फिनमेकेनिका का रास्ता आसान हो गया।
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