सीबीआई की अहमदाबाद कोर्ट ने बुधवार को एक ऐसे व्यक्ति को दोषी ठहराया है, जिसने पुराने ब्रिटिश भूमि रिकॉर्ड की फाइल देने के बदले 15000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड सेंटर का वह कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था। अब कोर्ट ने उस मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी सतधारी लाल साहू को तीन साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना, की सजा सुनाई है।
सीबीआई के मुताबिक, सतधारी लाल साहू, नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया, रिकॉर्ड सेंटर, झालाना डूंगरी, जयपुर (राजस्थान) में तत्कालीन आर्काइविस्ट थे। केंद्रीय जांच एजेंसी ने 26.12.2012 को यह मामला दर्ज किया था। आरोप था कि तत्कालीन आर्काइविस्ट सतधारी लाल साहू ने शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की अवैध रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत राजकोट सर्वे के पुराने 'सीआरओ' रिकॉर्ड की प्रतियां और पुराने ब्रिटिश भूमि रिकॉर्ड की एक फाइल देने के बदले मांगी गई थी।
शिकायतकर्ता ने साहू के दफ्तर में उक्त रिकॉर्ड की फाइल लेने के लिए कई चक्कर काटे थे। साहू ने कहा, अगर वह पंद्रह हजार रुपये देने के लिए तैयार है तो उसे रिकॉर्ड की प्रतियां मिल सकती हैं। मामले की शिकायत सीबीआई से की गई। नतीजा, सीबीआई ने एक जाल बिछाया और आरोपी सतधारी लाल साहू को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की अवैध रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
आरोपी सतधारी लाल साहू को 26.12.2012 को गिरफ्तार कर लिया गया था। आरोपी के घर और दफ्तर की तलाशी भी ली गई। जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 28.06.2013 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के बाद, कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।