केंद्रीय जांच ब्यूरो ने करीब 44 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के दो मामलों में कई ठिकानों पर छापे मारे हैं। सीबीआई अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि भारतीय यूनियन बैंक से फर्जीवाड़े के मामले में सूरत मांडवी विभाग सहकारी कृषि उद्योग मंडी लिमिटेड और उसके 17 पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने बताया कि इन लोगों ने 2013-15 के बीच बैंक से लिए कर्ज में फर्जीवाड़ा किया जिससे बैंक को 42.30 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। सूरत की मंगरोल तालुका स्थित यूनियन बैंक की पालोड शाखा ने ग्रीन कार्ड योजना के तहत 1728 किसानों के नाम पर इस सहकारी सोसायटी को 40 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। इस राशि को सोसायटी के चालू खाते में स्थानांतरित किया गया था।
सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक इस रकम को आगे किसानों तक पहुंचाया ही नहीं गया। सीबीआई ने इस मामले में आरोपी के सूरत स्थित घर व दफ्तराें समेत पांच ठिकानों पर छापा मारा।
वहीं दूसरा मामला गैर बैंकिंग ऋणदाता कंपनी आईएफसीआई के साथ 11.77 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का है। इसमें हैदराबाद की कंपनी त्रिनेत्र इंफ्रा वेंचर्स लिमिटेड और उसके वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारियों के ठिकानों पर छापा मारा गया।
सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने आईएफसीआई से कुछ संपत्तियों के फर्जी दस्तावेजों पर 8 करोड़ रुपये लिए थे जिन्हें लौटाया नहीं। इससे आईएफसीआई को 11.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने हैदराबाद, इलुरू, राजम और बंगलूरू में छापे मारे हैं।