सीबीआई ने मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक से दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय में पूछताछ की। सवाल-जवाब केंद्रीय एजेंसी के दिल्ली मुख्यालय में किए गए। उन पर आरोप है कि जब वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे, तो उन्हें दो फाइलों को क्लीयर करने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी।
इससे पहले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के 300 करोड़ रुपये की घूस ऑफर किए जाने के आरोपों को लेकर सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी थी। दरअसल, सत्यपाल मलिक ने दावा किया था कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहते हुए उन्हें 300 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। यह पेशकश 'अंबानी' और 'आरएसएस से संबद्ध व्यक्ति' की दो फाइलों को मंजूरी देने के एवज में दी जानी थी, लेकिन उन्होंने यह डील निरस्त कर दी।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा था कि उस वक्त पीएम ने उनसे कहा था कि वह भ्रष्टाचार से कोई समझौता न करें। उनके इस दावे की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र सरकार से की थी। जिसे अब केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
17 अक्तूबर 2021 को राजस्थान के झुंझुनू में एक कार्यक्रम में सत्यपाल मलिक ने कहा था, 'कश्मीर जाने के बाद मेरे पास दो फाइलें आईं। एक अंबानी की फाइल थी और दूसरी आरएसएस से जुड़े एक शख्स की थी जो पिछली महबूबा मुफ्ती और बीजेपी की गठबंधन सरकार में मंत्री थे। वह पीएम मोदी के भी बेहद करीबी थे। मुझे सचिवों ने सूचना दी कि इसमें घोटाला है और फिर मैंने बारी-बारी से दोनों डील रद्द कर दीं। सचिवों ने मुझसे कहा कि दोनों फाइलों के लिए 150-150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लेकिन, मैंने उनसे कहा कि मैं पांच कुर्ता-पायजामे के साथ आया हूं और सिर्फ उसी के साथ यहां से चला जाऊंगा।'