सीबीआई ने डीएचएफएल घोटाले की जांच में पक्ष लेने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में एसएफआईओ के उपनिदेशक हरीश कुमार तंवर, वकील भरत शर्मा और आर्यन शर्मा को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के जाल में फंसने पर वकील ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20 लाख रुपये लिए। आरोपियों के ठिकानों से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक करोड़ रुपये की घूस मांगने के आरोप में 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' (एसएफआईओ) के एक अधिकारी और वकील सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अधिकारी ने डीएचएफएल घोटाले से जुड़ी एसएफआईओ की जांच में शिकायतकर्ता का पक्ष लेने के बदले उससे एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की मांग की थी। गिरफ्तार आरोपियों में हरीश कुमार तंवर, आईओ, एसएफआईओ चेन्नई, वकील भरत शर्मा और आर्यन शर्मा (भरत शर्मा के रिश्तेदार) शामिल हैं।
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सीबीआई के अनुसार, एसएफआईओ हरीश कुमार 2017 बैच के आईआरएस (आईटी) अधिकारी हैं और वर्तमान में चेन्नई में एसएफआईओ में उप-निदेशक के पद पर तैनात हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने डीएचएफएल घोटाले से जुड़ी 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' की जांच में शिकायतकर्ता का पक्ष लेने का प्रयास किया था। इसके लिए उन्होंने एक करोड़ रुपये की अवैध मांग की।
शिकायत की पुष्टि होने और एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद, सीबीआई ने एक जाल बिछाया। इस दौरान, एसएफआईओ अधिकारी की ओर से, एक वकील ने शिकायतकर्ता से एक करोड़ रुपये की मांगी गई रिश्वत के हिस्से के रूप में 20 लाख रुपये लिए। इसके बाद सीबीआई ने एसएफआईओ के उप-निदेशक स्तर के अधिकारी, दिल्ली के एक वकील और एक अन्य निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। सरकारी अधिकारी और वकील के ठिकानों पर तलाशी के दौरान, मामले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज/सामग्री बरामद की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।