बोफोर्स तोप सौदा मामले में हिन्दुजा बंधुओं को आरोपमुक्त किए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सीबीआई ने 12 वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सनद रहे कि चंद दिनों पहले ही अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सीबीआई को हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती न देने की राय दी थी।
जानकारी के मुताबिक, सीबीआई को बोफोर्स मामले में कुछ नए तथ्य और साक्ष्य मिले हैं। नए तथ्य व साक्ष्य सामने आने के बाद अब सीबीआई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति दाखिल(एसएलपी) दायर की है।
बताया जा रहा है कि नए साक्ष्यों केआने केबाद अब अटॉर्नी जनरल
केके वेणुगोपाल ने भी सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की हरी झंडी दे दी। इससे पहले अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि सीबीआई को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं दायर करनी चाहिए क्योंकि याचिका खारिज होने की पूरी आशंका है।
मालूम हो कि हाईकोर्ट के फैसले को वकील अशोक अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। फिलहाल यह याचिका लंबित है। शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई भी होनी थी लेकिन नहीं हो सकी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील से पूछा था कि आखिरकार इस मामले में उन्हें क्यों सुना जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा था कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष या पीड़ित के करीबी अपील दायर कर सकता है। तीसरा पक्ष आखिर कैसे आपराधिक अपील दायर कर सकता है? उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने
सीबीआई से सवाल किया था कि आखिर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को आरोपमुक्त करने के 12 वर्ष बीत जाने केबाद भी एजेंसी ने अपील क्यों नहीं दायर की? उस दिन सीबीआई इस पर भी चुप रही थी कि वह अपील दाखिल करना चाहती है या नहीं?
मालूम हो कि 31 मई, 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन हिन्दुजा भाइयों और बोफोर्स कंपनी को आरोपमुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उसकी वजह से 250 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ। वहीं इससे पहले फरवरी 2004 में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आरोपमुक्त करते हुए बोफोर्स कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप तय करने का निर्देश दिया था।