सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रफीक दादा ने जस्टिस एसएस शिंदे ओर जस्टिस एनजे जामदार की पीठ को बताया कि कथित भ्रष्टाचार के मामले में देशमुख के खिलाफ सीबीआई की जांच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती थी।
महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह एनसीपी नेता अनिल देशमुख का बचाव करते हुए नहीं दिखना चाहती थी लेकिन सीबीआई आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ जांच में दखल देकर इसे प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री के खिलाफ जांच तक बढ़ाना चाह रही है।
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प्रदेश सरकार ने यह आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा देशमुख के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर कुछ हिस्सा अनुचित है और इसका मकसद शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी सरकार को अस्थिर करना है।
सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रफीक दादा ने जस्टिस एसएस शिंदे ओर जस्टिस एनजे जामदार की पीठ को बताया कि कथित भ्रष्टाचार के मामले में देशमुख के खिलाफ सीबीआई की जांच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती थी। वह केवल एफआईआर से कुछ हिस्सों को हटवाना चाहती थी।
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उन्होंने कहा कि हम देशमुख का समर्थन करते हुए नहीं दिखना चाहते थे। वह अब मंत्री नहीं रहे। रश्मि शुक्ला के खिलाफ बिना अनुमति के फोन टैप करने और गोपनीय रिपोर्ट को लीक करने को लेकर जांच चल रही है।