भारत सरकार को बैंको से धोखाधड़ी करके भागने वाले एक नागरिक को पकड़ने में कामयाबी मिली है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने कुछ बैंकों के साथ घोटाला करके बहरीन भागे मोहम्मद याह्या को गिरफ्तार कर लिया है और उसे देश वापस ले आई है। 47 साल के याह्या ने 2003 में बंगलूरू के कुछ बैंकों में लगभग 46 लाख रुपये का घोटाला किया और फिर विदेश भाग गया था।
घोटालेबाजों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए अगस्त में एक सख्त कानून बनाया गया था। जिसके बाद से यह पहला मामला है जब सरकार किसी भगोड़े को देश वापस लेकर आई है। आर्थिक अपराधी याह्या नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, जतिन मेहता, नितिन संदेसरा जैसे घाटालेबाजों की तुलना में काफी छोटा है लेकिन जांच एजेंसी के लिए उसका पकड़ा जाना एक सकारात्मक संदेश देता है।
याह्या को भारतीय प्राधिकारियों द्वारा भेजे गए इंटरपोल रेड नोटिस के बाद बहरीन अधिकारियों ने कुछ महीने पहले ही गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उच्च स्तर पर
बहरीन से उसके प्रत्यर्पण के लिए बातचीत की। जिसके बाद उसे भारत लाया गया। याह्या के खिलाफ सीबीआई ने 2009 में जांच शुरू की थी, लेकिन तबतक वह देश छोड़कर भाग चुका था। उसके खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। जिसके बाद उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।
जानकारी के अनुसार, बंगलूरू में जन्मे याह्या को बहरीन पुलिस ने कुछ वक्त पहले ही पकड़ा था। खुफिया एजेंसियों से उसकी पहचान भी पुख्ता भी करवाई गई थी। उसे एयर इंडिया की फ्लाइट से बहरीन से सीधा दिल्ली लाया गया था। फिर आगे की जांच के लिए उसे बेंगलुरु लेकर जाया जाएगा। हालांकि
सीबीआई ने इस बात की जानकारी देने से मना कर दिया है कि याह्या ने उसकी कंपनी ने किन बैंकों के साथ धोखाधड़ी की थी और कर्ज लेने का मकसद क्या था।