दिल्ली सरकार की कथित शराब नीति घोटाला मामला में अब सीबीआई 11 दिसंबर को टीआरएस एमएलसी के कविता का बयान दर्ज करेगी। सीबीआई ने बताया कि उनसे पूछताछ हैदराबाद स्थित उनके आवास पर रविवार को सुबह 11 बजे की जाएगी। गौरतलब है कि टीआरएस एमएलसी के कविता तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी हैं। इससे पहले उनसे छह दिसंबर यानी आज दिल्ली शराब घोटाला मामले में सीबीआई के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। जिसके बाद उन्होंने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए सीबीआई से कोई अन्य तारीख देने के लिए अपील की थी।
मिली जानकारी के मुताबिक, के कविता ने पांच दिसंबर यानी सोमवार को सीबीआई को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण वे मंगलवार को पूछताछ के लिए पेश नहीं हो सकती। गौरतलब है कि दो दिसबर यानी शुक्रवार को के कविता ने पुष्टि की थी कि सीबीआई की ओर से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के तहत उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इसमें उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था।
सीबीआई को लिखे गए पत्र में उन्होंने लिखा था कि "मैंने नोटिस को को पढ़ लिया है। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि कृपया मुझे शिकायत की प्रतियां प्रदान करें। दस्तावेज जल्द से जल्द उपलब्ध कराए जाएं, वह मामले को समझ सकें और उचित समय के भीतर मामले के बारे में जवाब दे सकें। दस्तावेजों की प्राप्ति के बाद हैदराबाद में हमारी मुलाकात की तारीख तय की जा सकती है।"
उन्होंने यह भी कहा था कि उनका नाम एफआईआर में शामिल नहीं है, बावजूद इसके मैं जांच में किसी भी प्रकार की जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हूं। मैं कानून का पालन करने वाली महिला हूं।
गौरतलब है कि दिल्ली शराब घोटाले में कथित रिश्वत पर दिल्ली की एक अदालत में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर एक रिमांड रिपोर्ट में उनका नाम सामने आने के बाद कविता ने कहा था कि वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। सीबीआई ने 25 नवंबर को इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था।
टीआरएस विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला
वही, टीआरएस विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामले में विशेष एसीबी अदालत से बीएल संतोष और 3 अन्य को बड़ी राहत मिली है। इस मामले में बीएल संतोष और 3 अन्य को अभियुक्त के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे एसआईटी द्वारा दायर एक याचिका को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया है। भाजपा नेता और अधिवक्ता रचना रेड्डी ने बताया कि एसआईटी की याचिका पर न्यायाधीश ने कहा कि वे पीसी अधिनियम की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। बीएल संतोष और 3 अन्य लोग अपराध के कथित दृश्य में शारीरिक रूप से उपस्थित भी नहीं थे।