आरोप है कि तत्कालीन सीएमडी और अन्य ने 2012-2017 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य समूह सदस्यों - बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक को धोखा देने की साजिश रची थी।
सीबीआई ने लोहा इस्पात लिमिटेड और इसके तत्कालीन अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक राजेश गौरीशंकर पोद्दार के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई वाले बैंकों के समूह से 1017.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
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आरोप है कि तत्कालीन सीएमडी और अन्य ने 2012-2017 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य समूह सदस्यों - बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक को धोखा देने की साजिश रची थी। सीबीआई ने एक बयान में कहा, कार्यशील पूंजी, मियादी कर्ज आदि के रूप में करीब 812.07 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
यह कार्रवाई एसबीआई की शिकायत पर शुरू की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि लोहा इस्पात और उसके निदेशकों, गारंटरों और अज्ञात अन्य लोगों ने संदिग्ध और गैर-मौजूद संस्थाओं के साथ नकली बिक्री और खरीद लेनदेन करके बैंक के धन का गबन किया है। एसबीआई की शिकायत के अनुसार, उन्होंने ऋणदाताओं को धोखा देने के इरादे से अवैध फायदा कमाने के लिए कथित रूप से साजिश रची।
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खातों में हेराफेरी कर धोखाधड़ी करने का आरोप
आरोप है कि आरोपी ने षड़यंत्र के अनुसरण में फर्जी बिक्री, खरीद लेनदेन और खातों में हेराफेरी के माध्यम से एसबीआई और अन्य पांच कंसोर्टियम सदस्य बैंकों को धोखा दिया और धन की हेराफेरी भी की जिसके परिणामस्वरूप बकाया ऋण का भुगतान नहीं किया गया। सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, आरोपी के आवासीय और आधिकारिक परिसरों में दिल्ली, मुंबई, रायगढ़ और ठाणे सहित नौ स्थानों पर तलाशी ली गई। जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए है।