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सरकार का हॉट केक क्यों बनी है सीबीआई? दांव पर लग गई साख

Thu, 17 Jan 2019 09:59 PM IST
अमित मंडल शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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cbi - फोटो : PTI
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सरकार का हॉट केक क्यों बनी है सीबीआई? यह बड़ा सवाल है। सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक, उ.प्र. पुलिस महानिदेशक(पूर्व) और प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी रहे प्रकाश सिंह के अनुसार इस समय तो केक (सीबीआई) कट रहा है। प्रकाश सिंह का कहना है कि सीबीआई जैसी जांच एजेंसी के लिए यह अब तक का सबसे बुरा दौर है।

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प्रकाश सिंह का कहना है कि पहले सीबीआई में दो अफसर (निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना) लड़ रहे थे। पुलिस की सेवा में ऐसा विरले ही मिलेगा कि नंबर दो इस तरह से अपने नंबर एक से लड़े, लेकिन राकेश अस्थाना के ऊपर सरकार का हाथ था और वह लड़े। इसके बाद सरकार ने आधी रात को दोनों को अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया। प्रकाश सिंह का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने आलोक वर्मा की छुट्टी के सरकार के फैसले को गलत बताया और उन्हें वापस भेजा, लेकिन सरकार ने उन्हें उस पर रहने नहीं दिया।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के जज जस्टिस सीकरी का रुख भी समझ में नहीं आया। इस बीच में पीआईएल भी दायर हुई और सरकार ने पहले से आरोपित एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बना दिया। अब इस पर सवाल है और अदालत में याचिका दायर है। प्रकाश सिंह का कहना है कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद एम नागेश्वर राव ने राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच में लगे सभी अफसरों का स्थानांतरण कर दिया। जब वर्मा आए तो उन्होंने स्थानांतरण को रद्द कर दिया और वर्मा को हटाए जाने के बाद एम नागेश्वर राव ने सभी अफसरों को फिर स्थानांतरित कर दिया।
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अफसरों को बाहर कर अपनी छवि सुधार रही है सरकार

प्रकाश सिंह सीबीआई के अफसर राकेश अस्थाना, एके शर्मा, एमके सिन्हा,जयंत जे नाइकरवरे के जांच एजेंसी से स्थानांतरण को अपनी (सरकार की) छवि सुधारने से जोड़ रहे हैं। सिंह का कहना है कि पहले सरकार ने अस्थाना को सह दिया और अब उनका स्थानांतरण हुआ है। सिंह का कहना है कि अस्थाना को पहले सीबीआई से हटा देना चाहिए था। एमके सिन्हा के स्थानांतरण को सिंह सही नहीं मानते। प्रकाश सिंह का कहना है कि एमके सिन्हा ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का फोन टैप होने के बाद उसके आधार पर डोभाल पर आरोप लगाया था। संभवत: इसलिए उन्हें सीबीआई से बाहर का रास्ता दिखया गया। प्रकाश सिंह का कहना है कि सीबीआई में हुए इस उथल-पुथल के लिए हर स्तर पर सरकार जिम्मेदार है, लेकिन अब वह अपनी छवि को ठीक कर रही है। सरकार कहना चाह रही है कि सीबीआई गंदे अफसर भर गए थे। इनके कामकाज, आचरण से सीबीआई की गरिमा धूमिल हो रही थी। इसलिए सब हटाए जा रहे हैं और नये अफसर आकर अच्छा काम करेंगे।

24 जुलाई को तय होंगे नये निदेशक

24 जुलाई को सीबीआई निदेशक के चयन के लिए समिति की बैठक होगी। इस समिति में तीन सदस्य(प्रधानमंत्री, देश के प्रधान न्यायाधीश और नेता विपक्ष) होते हैं। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े नये निदेशक के चयन को लेकर काफी संवेदनशील हैं। वह स्वतंत्र, ईमानदार और अच्छे निदेशक के चयन को लेकर आशंकित भी है। चयन समिति की बैठक में देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गगोई खुद आते हैं या अपने नामित सदस्य को भेजते हैं, यह भी एक बड़ा सवाल है। माना जा रहा है कि नये निदेशक के चयन में भी टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

अरुण जेटली का ब्लॉग और सीबीआई की सफाई

इलाज के लिए अमेरिका गए केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वहां से ब्लॉग लिखा है। ब्लॉग में जेटली ने सीबीआई के सफाई की बात की है। अरुण जेटली ने ब्लॉग में लिखा कि केन्द्र सरकार ने सीबीआई में सफाई की और जो लोग सरकार के इस कदम पर अंगुली उठा रहे हैं, वो कितने साफ हैं? यह अजीब संयोग है कि जेटली का ब्लॉग बृहस्पतिवार को चर्चा में आया और देर शाम सीबीआई से राकेश अस्थाना, एमके सिन्हा, एके शर्मा का स्थानांतरण कर दिया गया। यानी सरकार ने सीबीआई में सफाई का कदम आगे बढ़ा दिया। इससे सीबीआई में नई अफसरों की तैनाती का रास्ता साफ होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली के ब्लॉग से साफ है कि सरकार सीबीआई की साख बचाने, बनाने, जांच ऐजेंसी की स्वायत्तता, स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मर्यादा के विपरीत काम करने वाले अफसरों को बाहर का रास्ता दिखा रही है। प्रकाश सिंह भी यही मानते हैं।

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