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अरुणाचल में सीबीआई की कार्रवाई: पर्यावरण कार्यकर्ता भानु तातक पर केस दर्ज, 20.94 लाख के विदेशी फंड का आरोप

Tue, 15 Sep 2026 07:32 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सीबीआई ने अरुणाचल प्रदेश की पर्यावरण कार्यकर्ता और वकील भानु तातक के खिलाफ कथित FCRA उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। एजेंसी के मुताबिक, उनके बैंक खाते में 2022 से 2025 के बीच 20.94 लाख रुपये से अधिक का विदेशी फंड आया, जबकि उनके पास FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं थी।
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सीबीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अरुणाचल प्रदेश की पर्यावरण कार्यकर्ता और वकील भानु तातक के खिलाफ विदेशी फंड प्राप्त करने के मामले में केस दर्ज किया है। एजेंसी का आरोप है कि तातक ने बिना जरूरी पंजीकरण या पूर्व अनुमति के करीब 20.94 लाख रुपये का विदेशी योगदान हासिल किया। सीबीआई के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल राज्य में दो जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने और उन्हें जारी रखने के लिए किया गया। मामले में भानु तातक की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।

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20.94 लाख रुपये के विदेशी फंड का आरोप
सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा-II ने दिल्ली में 20 अगस्त को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें तातक और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 यानी FCRA की धारा 11(1), 17, 19 और 35 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर के अनुसार, भानु तातक का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रोइंग शाखा में बचत खाता है। आरोप है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच इस खाते में विदेशी मुद्रा लेनदेन के जरिए कुल 20,94,088 रुपये प्राप्त हुए। सीबीआई का कहना है कि इन रकमों को हासिल करने के लिए गृह मंत्रालय से आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
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दो जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ प्रदर्शन का आरोप
सीबीआई की प्रारंभिक जांच में आरोप लगाया गया कि तातक सियांग स्वदेशी किसान मंच (SIFF) की कानूनी सलाहकार और दिबांग प्रतिरोध (DR) की समन्वयक थीं। जांच के अनुसार, उन्होंने FCRA के तहत अनिवार्य पंजीकरण कराए बिना अपने निजी बचत खाते में विदेशी योगदान प्राप्त किया।

जांच में दावा किया गया कि इन पैसों का इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (एसयूएमपी) और दिबांग बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने और उन्हें जारी रखने में किया गया। जांच एजेंसी के दस्तावेज के मुताबिक, विदेशी संस्थाओं से मिली रकम के उद्देश्य का खुलासा नहीं किया गया था। आरोप है कि प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा कई UPI लेनदेन के जरिए खर्च किया गया।

आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने का भी आरोप
प्रारंभिक जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि तातक ने वित्त वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया। जांच के अनुसार, इस वजह से विदेशी संस्थाओं या संगठनों से प्राप्त रकम के संबंध में भी कोई घोषणा नहीं की गई। जांच में यह भी कहा गया कि तातक ने विदेशी फंड के संबंध में FCRA के तहत न तो पंजीकरण कराया और न ही पूर्व अनुमति हासिल की। इसके अलावा, जांच में उन्हें FCRA के तहत पंजीकृत या पूर्व अनुमति प्राप्त किसी संगठन की पदाधिकारी, सदस्य या कार्यकर्ता के तौर पर भी नहीं पाया गया।

गृह मंत्रालय ने CBI को सौंपी जांच
सीबीआई के दस्तावेज के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि तातक ने अज्ञात लोगों के साथ कथित साजिश के तहत FCRA के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए विदेशी योगदान प्राप्त किया। गृह मंत्रालय (MHA) ने FCRA की धारा 43 के तहत मामले की जांच CBI को सौंपी है। मंत्रालय ने एजेंसी से यह भी कहा है कि जांच के दौरान यदि आयकर अधिनियम, 1961 या धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 समेत किसी अन्य कानून के उल्लंघन की जानकारी सामने आती है, तो संबंधित सक्षम प्राधिकरणों को उचित सूचना दी जाए।

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