पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद भड़की हिंसा का एक बड़ा गुनहगार आखिरकार कानून के फंदे में फंस गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में साल से फरार चल रहे घोषित अपराधी खालिद-उज-जमान को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई की टीम ने आरोपी को महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के एक सुदूर गांव येताला से दबोचा है। क्या कोई अपराधी कानून की नजरों से हमेशा के लिए छिप सकता है? इस गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि देर-सवेर गुनाह का हिसाब देना ही पड़ता है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
यह मामला साल 2021 का है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के उत्तर कलसारा गांव में तीन मई 2021 को हसनुर जमान नाम के व्यक्ति की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दत्तपुकुर थाने में प्राथमिकी (FIR No. 286/2021) दर्ज की गई थी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त 2021 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।
हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए सीबीआई ने 1 सितंबर 2021 को इस केस को अपने हाथ में लिया था। जांच एजेंसी इस मामले में खालिद-उज-जमान सहित 13 आरोपियों के खिलाफ साल 2021-22 के दौरान आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दाखिल कर चुकी थी। लेकिन खालिद लगातार फरार चल रहा था।
कैसे जाल में फंसा भगोड़ा?
- आरोपी खालिद-उज-जमान साल 2021 में एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहा था।
- आरोपी कभी भी जांच या अदालती मुकदमे की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ, जिसके बाद उसे घोषित अपराधी ठहराया गया था।
- गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी को धर्माबाद की सक्षम अदालत में पेश किया, जहां से उसकी ट्रांजिट रिमांड मंजूर की गई।
- आरोपी को अब कोलकाता ले जाया जा रहा है, जहां उसे बारासात के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में पेश किया जाएगा।
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सीबीआई का 'ऑपरेशन चक्र-VI'
सीबीआई ने केवल बंगाल हिंसा के आरोपी को ही नहीं दबोचा, बल्कि देशव्यापी स्तर पर साइबर अपराधियों के खिलाफ भी एक बड़ा अभियान चलाया है। जांच एजेंसी ने 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत 'डिजिटल अरेस्ट' करने वाले ठगों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके लिए सीबीआई ने 60 विशेष टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने देश के 16 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह तलाशी अभियान पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में चलाया गया।
यह पूरा नेटवर्क डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों को डराकर ठगी करने के 200 से अधिक मामलों में शामिल था। इस कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने चेन्नई और कोलकाता से दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी फर्जी शेल कंपनियां बनाने और 'म्यूल बैंक अकाउंट' (दूसरों के नाम पर खाते) संचालित करने का काम करते थे। इन खातों के जरिए करीब दो करोड़ रुपये की काली कमाई को ठिकाने लगाया गया था। क्या इन साइबर ठगों के पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय गिरोह काम कर रहा है? सीबीआई अब इस मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है।